<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:itunes="http://www.itunes.com/dtds/podcast-1.0.dtd" version="2.0"><channel><title>The Wire Hindi - Latest News</title><link>https://thewirehindi.com/</link><atom:link href="http://rss.144-124-237-35.sslip.io/thewirehindi" rel="self" type="application/rss+xml"></atom:link><description>Latest news from The Wire Hindi - Powered by AtomRSS</description><generator>AtomRSS</generator><webMaster>contact@atomgroup.dev (AtomRSS)</webMaster><language>hi</language><lastBuildDate>Sat, 08 Aug 2026 07:05:29 GMT</lastBuildDate><ttl>5</ttl><item><title>ढाका के विरोध के बाद भारत ने कहा- तारिक़ रहमान सरकार के ख़िलाफ़ हसीना की टिप्पणियों...</title><description>&lt;p&gt;बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना 5 अगस्त को दिल्ली के फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया में हुए कार्यक्रम में ऑनलाइन शामिल हुई थीं, जिस पर ढाका ने कड़ी आपत्ति जताई है. अब भारत ने अपना पहले का रुख़ दोहराते हुए कहा कि उसकी कार्यक्रम में कोई भूमिका नहीं थी, और मंच पर कही गई किसी भी बात, ख़ासकर बांग्लादेश की विधिवत गठित सरकार के संबंध में हुई टिप्पणियों का, वह समर्थन नहीं करता.&lt;/p&gt;
&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;img src=&quot;https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/01/Randhir-Jaiswal-PTI01_09_2026_000265B-scaled-1-e1768039015419.jpg&quot; alt=&quot;Randhir Jaiswal PTI01_09_2026_000265B-scaled&quot; style=&quot;max-width: 100%; height: auto;&quot; referrerpolicy=&quot;no-referrer&quot;&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नई दिल्ली:&lt;/strong&gt; बांग्लादेश की ओर से कड़े शब्दों में विरोध दर्ज कराए जाने के बाद भारत ने शुक्रवार (7 अगस्त) को दोहराया कि नई दिल्ली में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा की गई &lt;a href=&quot;https://thewire.in/diplomacy/after-dhaka-protest-india-says-doesnt-endorse-hasina-remarks&quot;&gt;विवादास्पद प्रेस वार्ता में उसकी कोई भूमिका नहीं थी&lt;/a&gt;.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कार्यक्रम में बांग्लादेश की ‘विधिवत गठित सरकार’ के बारे में की गई किसी भी टिप्पणी का वह समर्थन नहीं करता.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय द्वारा हसीना के फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (एफसीसी) में उपस्थित होने पर नाराजगी जताए जाने के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस मामले पर सरकार का रुख पहले जैसा ही है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;जायसवाल ने द्वि-साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा, ‘प्रेस कॉन्फ्रेंस होने से पहले ही मैंने इस मुद्दे पर सरकार का रुख स्पष्ट कर दिया था. आपने वे टिप्पणियां देखी होंगी.’&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;उन्होंने कहा कि भारत सरकार की ‘उस कार्यक्रम में कोई भूमिका नहीं थी, क्योंकि यह एक निजी मीडिया संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम था’ और ‘मंच पर कही गई किसी भी बात का, खासकर बांग्लादेश की विधिवत गठित सरकार के संबंध में कही गई बातों का, वह समर्थन नहीं करती.’&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;‘बांग्लादेश की विधिवत गठित सरकार’ का ज़िक्र नई दिल्ली की बात में एक खास इज़ाफ़ा था.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;मंगलवार को कार्यक्रम के आयोजन से पहले जायसवाल ने केवल इतना कहा था कि यह बातचीत ‘एक निजी मीडिया संस्था’ द्वारा आयोजित की जा रही है, सरकार की इसमें ‘किसी भी तरह की कोई भागीदारी नहीं’ है और वह खुद इस कार्यक्रम का समर्थन नहीं करती.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;तीन दिन बाद हसीना द्वारा मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पूर्व अंतरिम सरकार और प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली मौजूदा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सरकार, दोनों पर हमला किए जाने के बाद भारत ने मुख्य रूप से बांग्लादेश की निर्वाचित सरकार के संबंध में उनकी टिप्पणियों से खुद को अलग कर लिया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;यह प्रतिक्रिया बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के उस &lt;a href=&quot;https://thewirehindi.com/334813/hasina-says-she-will-return-to-bangladesh-in-december/&quot;&gt;बयान&lt;/a&gt; के बाद आई, जिसे असामान्य रूप से तीखा माना गया. बांग्लादेशी मंत्रालय ने कार्यक्रम को रोकने के लिए भारत को पहले ही चेतावनी दी थी.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने बुधवार रात कहा, ‘बांग्लादेश इस बात से बहुत नाराज़ है कि फरार नरसंहार की दोषी शेख हसीना को आज शाम नई दिल्ली में मीडिया के साथ लाइव बातचीत करने की इजाज़त दी गई, जहां उन्होंने और उनके गुर्गों ने बांग्लादेश सरकार और उसके लोगों के खिलाफ ज़हरीली बातें कीं.’&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;मंत्रालय ने इस कार्यक्रम को ‘बांग्लादेश की संप्रभुता का अपमान’ बताया. उसने कहा कि भारतीय जमीन से हसीना को मीडिया को संबोधित करने की अनुमति देना बांग्लादेशियों के लिए ‘बेहद दुख देने वाला’ और दोनों देशों के बीच ‘सौहार्दपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए नुकसानदायक’ है. मंत्रालय ने यह भी जोड़ा कि ‘हमारा देश फिर कभी फासीवाद के अंधेरे दौर में नहीं लौटेगा और बांग्लादेश कभी किसी का आश्रित राष्ट्र नहीं बनेगा.’&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;बयान में 2013 की भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि के तहत हसीना के प्रत्यर्पण की बांग्लादेश की मांग भी दोहराई गई. इसमें कहा गया कि भारत ने बार-बार किए गए अनुरोधों का अब तक कोई जवाब नहीं दिया है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;हालांकि, विरोध दर्ज कराने के एक दिन बाद बांग्लादेश की विदेश मामलों की राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने अपने देश की आपत्तियों को बरकरार रखते हुए कुछ नरम रुख &lt;a href=&quot;https://unb.com.bd/category/Bangladesh/india-needs-to-be-more-sensitive-to-bangladeshi-peoples-sentiments-shama-obaed/192471&quot;&gt;अपनाया&lt;/a&gt;.उन्होंने कहा कि भारत को बांग्लादेशी जनता की भावनाओं के प्रति ‘अधिक संवेदनशील’ होना चाहिए और उसे यह तय करना चाहिए कि वह हसीना और अवामी लीग के नेताओं को भारतीय क्षेत्र से राजनीतिक गतिविधियां करने की अनुमति देना जारी रखेगा या नहीं.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इसके साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि ढाका नई दिल्ली के साथ सकारात्मक संबंध बनाए रखना चाहता है.&amp;nbsp;उन्होंने कहा, ‘हम दोनों देशों के लोगों के हित में अच्छे संबंध चाहते हैं. लेकिन यह संबंध समानता, आपसी सम्मान और गरिमा पर आधारित होना चाहिए.’&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;उन्होंने आगे जोड़ा कि दोनों देशों को जल बंटवारे, ऊर्जा सहयोग और सीमा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर लगातार बातचीत जारी रखने की जरूरत है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश में फरवरी में हुए चुनाव से पहले ही भारत ने बीएनपी नेतृत्व के साथ संपर्क बढ़ाना शुरू कर दिया था. भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पिछले साल पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया था. बीएनपी सरकार के सत्ता में आने के बाद नई दिल्ली ने एक भाजपा नेता को बांग्लादेश में अपना उच्चायुक्त नियुक्त किया, वीजा सेवाएं फिर से शुरू कीं और कुछ व्यापार प्रतिबंधों में ढील दी.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;यह स्थिति अंतरिम यूनुस सरकार के दौरान दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों से अलग है. हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने सत्ता संभाली थी. दोनों देशों के बीच जारी संपर्क के ताजा संकेत के रूप में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी 10 अगस्त को प्रधानमंत्री रहमान से मुलाकात करने वाले हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;मालूम हो कि अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए आंदोलन के बाद बांग्लादेश से भागने के बाद से हसीना भारत में रह रही हैं. उन्होंने बुधवार को एफसीसी में एक ऑडियो लिंक के जरिए पत्रकारों को संबोधित किया. निर्वासन में रहते हुए यह उनका दूसरा सार्वजनिक कार्यक्रम और मीडिया के साथ पहली लाइव बातचीत थी.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;अपने संबोधन में उन्होंने &lt;a href=&quot;https://thewire.in/south-asia/hasina-says-will-to-return-bangladesh-in-december-dhaka-furious&quot;&gt;घोषणा&lt;/a&gt; की कि गिरफ्तारी की आशंका के बावजूद वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी. उन्होंने जुलाई-अगस्त 2024 के उस आंदोलन के आधिकारिक नैरेटिव को खारिज किया, जिसने उनके 15 साल लंबे शासन का अंत किया था. उन्होंने ढाका में एक के बाद एक सरकारों पर लोकतंत्र को खत्म करने और राजनीतिक विरोधियों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;उनके बेटे साजीब वाजेद जॉय और अवामी लीग के कई पूर्व नेताओं ने भी कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से हिस्सा लिया. जॉय ने आरोप लगाया कि इस्लामी ताकतों के कथित पुनरुत्थान के कारण बांग्लादेश के ‘दूसरा पाकिस्तान’ बनने का खतरा पैदा हो गया है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;गुरुवार को जॉय की टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर जायसवाल ने सीधे तौर पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;उन्होंने कहा, ‘हम अपने पड़ोस में होने वाले घटनाक्रम पर लगातार करीबी नजर रखते हैं. ऐसा करते हुए हम अपने राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हैं और इस संबंध में जो भी कदम उठाने होते हैं, हम अपने हितों की सुरक्षा के लिए वे कदम उठाते हैं.’&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;जायसवाल से एक अलग सवाल बांग्लादेश द्वारा ऊर्जा संकट के बीच भारत से पेट्रोलियम आपूर्ति के लिए संपर्क किए जाने संबंधी खबरों पर भी पूछा गया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;उन्होंने कहा कि उनके पास अभी कोई ताज़ा जानकारी नहीं है, लेकिन उन्होंने यह ज़रूर कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच ‘आर्थिक क्षेत्र’ और ‘ऊर्जा क्षेत्र’ में लगातार संबंध बने हुए हैं.&lt;/p&gt;
</description><link>https://thewirehindi.com/334940/after-dhaka-protest-india-says-doesnt-endorse-hasina-remarks/</link><guid isPermaLink="false">https://thewirehindi.com/334940/after-dhaka-protest-india-says-doesnt-endorse-hasina-remarks/</guid><pubDate>Fri, 07 Aug 2026 22:36:35 GMT</pubDate><author>[object Object]</author><enclosure url="https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/01/Randhir-Jaiswal-PTI01_09_2026_000265B-scaled-1-e1768039015419.jpg" type="image/jpeg"></enclosure><itunes:image href="https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/01/Randhir-Jaiswal-PTI01_09_2026_000265B-scaled-1-e1768039015419.jpg"></itunes:image><category>भारत</category><category>Awami League</category><category>Bangladesh</category><category>Bangladesh Foreign Ministry</category><category>Bangladesh Government</category><category>Bangladesh PM</category><category>BNP</category><category>Exile</category><category>featured</category><category>Haseena in Exile</category><category>India-Bangladesh Relation</category></item><item><title>राग जौनपुरी: उस ‘शिराज़-ए-हिंद’ का आख्यान, जहां ‘हिंदू तुरुक के मिलल बास’</title><description>&lt;p&gt;पुस्तक समीक्षा: जौनपुर शहर के पर्याय बन गए कवि, गद्यकार, चित्रकार और मूर्तिकार स्मृतिशेष अजय कुमार की ‘राग जौनपुरी’ से गुज़रना जौनपुर के राग से ही नहीं, विराग और वास्तु तक से गुजरने और इतिहास व संस्कृति की सुगंध से सराबोर होने का पर्याय लगता है.&lt;/p&gt;
&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;img src=&quot;https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Raag-Jaunpuri-Book-Cover.jpg&quot; alt=&quot;Raag Jaunpuri Book Cover&quot; style=&quot;max-width: 100%; height: auto;&quot; referrerpolicy=&quot;no-referrer&quot;&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;p&gt;सन् 1359 में दिल्ली के तत्कालीन सुल्तान फिरोजशाह तुगलक ने अयोध्या व वाराणसी के बीच एक ‘नया’ शहर बसाया और अपने चचेरे भाई मुहम्मद बिन तुगलक (जिसे ‘जौना खां’ नाम से जाना जाता था) के नाम पर उसका नाम ‘जौनपुर’ रखा तो शायद ही किसी ने उम्मीद की हो कि नया-नया बसा यह शहर अपनी उम्र के पचास साल पूरे करने से पहले ही ऐतिहासिक शर्की सल्तनत की राजधानी बन जाएगा.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;लेकिन हुआ कुछ ऐसा ही. फिरोजशाह तुगलक की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार के संघर्ष में उसके दरबार में खासा दबदबा रखने वाले मलिक सरवर नामक सरदार ने बड़ी भूमिका निभाकर अपनी राजनीतिक सूझबूझ व वफादारी के बदले सल्तनत का वजीर पद और ‘ख्वाजा-ए-जहां’ की उपाधि प्राप्त कर ली.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;अनंतर, 1394 में सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद शाह तुगलक ने ‘मलिक-उस-शर्क’ (पूरब के स्वामी) की एक और उपाधि देकर उसको जौनपुर का प्रशासक बनाया, साथ ही कन्नौज से बिहार तक का बड़ा क्षेत्र उसके अधीन कर दिया तो उसकी महत्वाकांक्षा ऐसी जागी कि उसने तुगलक वंश की कमज़ोरियों का फायदा उठाकर उसे अपनी स्वतंत्र सल्तनत बना लिया. यह सल्तनत उसकी ‘शर्क’ वाली उपाधि के कारण शर्की नाम से प्रसिद्ध हुई और उसके वंश के कुल मिलाकर पांच शासक हुए.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;संस्कृतियों का संगम&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;अलबत्ता, इस सल्तनत ने अपना स्वर्णकाल इब्राहीम शाह शर्की व हुसैन शाह शर्की के शासनकालों में देखा, जब उसकी सीमाओं के विस्तार के साथ उसमें शिक्षा व कला को भरपूर बढ़ावा मिला और धर्मों व संस्कृतियों का ऐसा संगम हुआ, जिसने जौनपुर को शिराज-ए-हिंद (हिंदुस्तान का चिराग) बना दिया. इब्राहीम शाह के वक्त मैथिली के महान कवि, संगीतकार और संस्कृत के विद्वान विद्यापति वहां पहुंचे तो पाया कि वहां ‘हिन्दू तुरुक के मिलल बास’ है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;लेकिन 1479 में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में बहलोल लोदी ने हुसैन शाह शर्की को हराकर इस सल्तनत को दिल्ली सल्तनत में मिला लिया (जो तब तक उसके वंश की हो चुकी थी) और 1486 में अपने बड़े बेटे बर्बक शाह को उसका प्रशासक नियुक्त कर दिया तो यह नियुक्ति फर्स्ट को फली नहीं. बहलोल की मौत हुई और उसका दूसरा बेटा सिकंदर लोदी दिल्ली की गद्दी पर बैठा तो बर्बक ने विद्रोह कर दिया, जो विफल रहा. नतीजा यह हुआ कि सिकंदर लोदी ने उसके द्वारा प्रशासित क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर उसे दिल्ली सल्तनत का हिस्सा बना लिया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;यह स्थिति 1559 में मुगल बादशाह अकबर द्वारा उसे मुगल सल्तनत में मिलाए जाने तक बरक़रार रही. कोई डेढ़ सौ साल अपनी सल्तनत में बनाए रखने के बाद मुगलों ने 1722 में इस क्षेत्र को, जिसको अब महज जौनपुर नाम से ही पहचाना जाता था, अवध के नवाब को सौंप दिया तो कहते हैं कि दो गंगाजमुनी तहजीबों का मिलन हुआ.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इस मिलन में अवध के लिए यह देखना बहुत सुखद था कि जिस गंगा-जमुनी तहजीब का वह अलंबरदार है, जौनपुर सर्वथा निर्दंभ भाव से उसकी उससे ज्यादा सेवा व विकास कर रहा है. दूसरे शब्दों में कहें, तो उसने हिंदू-मुस्लिम सद्भाव के साथ ज्ञान व कलाओं के संरक्षण तक में जी-जान लगाकर उनमें ऐसी सुगंध भर दी है, जो सदियों तक जाने वाली नहीं है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;हिंदी में जनपदीय इतिहास लिखने, उसको राष्ट्रीय इतिहास से जोड़ने व सांस्कृतिक व साहित्यिक आयामों से उसका मेल कराने की परंपरा समृद्ध हो पाई होती तो आप हमारे यह सब बताए बगैर ही इस सुगंध से परिचित होते. लेकिन विडंबना यह कि इस परंपरा की बदहाली के मद्देनजर अपने इस संसार में रहते ही जौनपुर शहर के पर्याय बन गए बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी कवि, गद्यकार, चित्रकार और मूर्तिकार स्मृतिशेष अजय कुमार ने ‘&lt;a href=&quot;https://navarun.com/product/raag-jaunpuri-ajay-kumar-2025/&quot;&gt;राग जौनपुरी&lt;/a&gt;‘ नाम से जौनपुर के इतिहास, संस्कृति और साहित्य पर केन्द्रित एक पुस्तक लिखी तो वह उनके जीवनकाल में प्रकाशित ही नहीं हो सकी.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;अब नवारुण पब्लिकेशन ने उसे प्रकाशित कर एक बड़ी रिक्ति भर दी है तो उससे गुजरना जौनपुर के राग से ही नहीं, विराग और वास्तु (क्योंकि शर्की सल्तनत को उसके वक्त की इमारतों के वास्तु शिल्प के लिए भी जाना जाता है) तक से गुजरने और इतिहास व संस्कृति की सुगंध से सराबोर होने का पर्याय लगता है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इस कारण और कि इसमें बोलचाल की भाषा व बतकही वाली शैली का ऐसा दिलचस्प इस्तेमाल हुआ है, जो कहीं से भी उसको बोझिल नहीं बनाता. न ही यह अहसास होने देता है कि लेखक अपनी धारणाओं को पाठकों पर बरबस प्रक्षेपित करने के फेर में है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;बनारस का मोहल्ला!&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;मिसाल के तौर पर इसमें छपे 1975-76 के उनके एक लेख का यह छोटा-सा अंश देखिए:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;em&gt;ठाकुर प्रसाद सिंह ने कभी लिखा था कि ‘नगर के रूप में कलकत्ता ही जन्मा है, बाकी तमाम कस्बे से विकसित होकर नगर बने हैं.’ जौनपुर के बारे में यही बात दोहरानी हो तो मैं इसे इस तरह कहने की इजाजत चाहूंगा कि ‘कुछ कस्बे से नगर के रूप में विकसित होकर भी कस्बे ही रह गए, जैसे हमारा जौनपुर.’ पर दिक्कत तो यह है कि खुद ठाकुर प्रसाद सिंह इसे एक कस्बा भी नहीं मानते, एक मोहल्ला ही तस्लीम करते हैं – ‘उनके’ बनारस का एक मोहल्ला भर. &lt;/em&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इसी लेख में अजय कुमार ने आगे लिखा है कि एक समय ठाकुर प्रसाद सिंह के इस कथन से उनके जौनपुरीपन को हल्की-सी ठेस लगी थी, लेकिन फिर सोचा कि बहस बढ़ाकर हासिल क्या होना है?&amp;nbsp;लाख बनारस सा पुराना इतिहास क्यों न हो, उससे विशाल साम्राज्य की राजधानी क्यों न रहा हो, जौनपुर है तो कमबख्त बनारस का एक मोहल्ला ही. पटवारी के कागजात में कुछ भी लिखा हो, मौके पर कब्जा तो बनारस का ही है. (बाद में उनकी यह धारणा बदली तो ‘थोड़ी हाशिया आराई’ में उन्होंने लिखा कि अब पटवारी के कागज के साथ मौके पर भी जौनपुर का कब्जा हो चुका है.)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;बहरहाल, जौनपुर के बारे में बताने का उनका अंदाज इतना खिलंदड़ है कि कुछ न पूछिए:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;em&gt; जौनपुर सिर्फ एक सड़क पर चलता है जो स्टेशन से शुरू होकर शहर से गुजरती हुई सीधे बनारस निकल जाती है, कहीं रुकती नहीं. जैसे बनारस में कहीं से किधर को क्यों न जाइये, एक गली सामने पड़ जायेगी, वैसे ही जौनपुर में भी कहीं से कहीं को जाइये, यह सड़क आपको ठेंगा जरूर दिखायेगी. … लगता है अकबर बादशाह को कुछ इल्म नजूम भी था जो उसने सारा शहर छोड़कर अपना मशहूर पुल और पक्की सराय इसी सड़क पर बनवाई. जब इस पुल को बनाने वालों को जमीन में दबी शेर हाथी की एक विशालकाय मूर्ति मिली, तो उसे भी उन्होंने इसी सड़क पर बैठा दिया. &lt;/em&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;em&gt;अब शर्की बादशाहों और अंग्रेज बहादुर को क्या कहा जाये जिन्होंने अपनी मस्जिदें, जेल-कचेहरी इधर-उधर छिटका दीं, वरना जौनपुर देखने आने वालों को यहां रुकने की जहमत नहीं करनी पड़ती. एक तरफ से घुसते और दूसरी तरफ से निकल जाते. वैसे यहां आता ही कौन है? गुजरे जमाने में आते थे, मुसीबतजदा भी और मुसीबतशुदा भी. एक जिन पर कहीं से हमला होता था या जो कहीं से आकर यहां हमला करते थे.&lt;/em&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;‘गलतियों’ से बना ‘सही इतिहास’!&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;जौनपुर की तारीफ करते हुए भी उनका अंदाज-ए-बयां थोड़े ब्याज और ब्याज स्तुति के साथ वैसा ही है: &lt;em&gt;बापू जब बापू नहीं बने थे, तब भी दक्षिण अफ्रीका में एक जौनपुरी उनके साथ था. &lt;/em&gt;(स्व. रामसुंदर पाठक उर्फ जटाशंकर पाठक. इटवा गांव के प्रसिद्ध संग्रामी स्व. शिव वर्ण शर्मा के बड़े भाई. वे कुली के रूप में दक्षिण अफ्रीका गए थे और महात्मा ने वहां नस्लभेदी सरकारों के खिलाफ आंदोलन छेड़ा, तो उनके अनन्य सहयोगियों में से एक और पहले सत्याग्रही बने.) और जब वे भारत आए ये तो सारा जौनपुर उनके साथ हो लिया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;जौनपुर को दो बार राष्ट्रपिता के स्वागत का सौभाग्य प्राप्त हुआ. एक विशिष्ट संयोग इसमें जुड़ा है- वे अपनी एक सालगिरह (02 अक्टूबर, 1929) पर यहां थे. इससे पहले फरवरी, 1921 में जौनपुर में कांग्रेस के संस्थापक स्वर्गीय रामेश्वर प्रसाद सिंह के अनुरोध पर काशी से लखनऊ जाते समय भी. उन्होंने पुस्तक में जवाहरलाल नेहरू की जौनपुर की यात्राओं पर रामेश्वर प्रसाद सिंह की लिखी एक टिप्पणी भी दी है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;‘राग जौनपुरी’ की उनके द्वारा बताई गई तफसील भी कुछ कम दिलचस्प नहीं है, जो उनके अनुसार आज भी तलवार के धनी पर किस्मत के गरीब विद्याप्रेमी, चित्रकार व महान संगीतज्ञ हुसैन शाह की कीर्ति का गान कर रहा है, जिन्होंने दर्जन भर राग-रागिनियां बनाईं और गंधर्व की उपाधि पाई. बड़े बड़े उस्तादों की प्रातः वंदना की शोभा है यह राग.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;उनके ही शब्दों में:&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;em&gt;पोर्ट ब्लेयर के संगीत शिक्षक भट्टाचार्य मोशाय ने एक कथा सुनाई थी – एक जौनपुरी गांधार में गलत सुर लगा गए. जानकारों ने टोका यह कौन सा राग है? उस्ताद समझ तो गए अपनी ग़लती, पर जवाब फ़र्रूख़ाबादी दिया, मैं जौनपुरी हूं और यह राग जौनपुरी है. बात सही है या ग़लत, मुझे तो बस सुनकर मजा आ गया. क्या जादू है इस शहर का – गलती भी न सिर्फ सही हो जाती, बल्कि जम जाती है और सही की ऐसी-तैसी कर देती है…. ऐसी ही असंख्य गलतियों से बना है जौनपुर शहर. इसका इतिहास गलतियों का इतिहास है. किसने सही कहा होगा, जब नूर मोहम्मद ने कहा था – एक बिरिछ लागी दुइ डारा. एकहि ते नाना परकारा.. मातु के रक्त पिता के बिंदू. उपजे दोऊ तुर्क और हिंदू.. पर इसे गलत कहने वाले नहीं जानते थे कि एक दिन इस अकेले कंठ की पुकार समूचे राष्ट्र की आवाज बन जायेगी. गलतियों की एक लम्बी परंपरा एक सही इतिहास को जन्म देगी.&lt;/em&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;कैसे कैसे जौनपुरी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;क्या आश्चर्य कि पुस्तक की एक टिप्पणी का शीर्षक ‘ऐसे-ऐसे जौनपुरी’ है तो एक अन्य का ‘कैसे-कैसे जौनपुरी’. एक अध्याय ‘ऐसे जौनपुरी थे वामिक साहब’ भी है, जिसकी बाबत जानना जरूरी है कि अजय कुमार की कोशिशें न होतीं तो ‘भूखा बंगाल’ जैसे कालजयी गीत की सर्जना के बावजूद हिंदी की दुनिया वामिक से अपरिचित ही रह जाती.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;बहरहाल, अजय कुमार लिखते हैं: &lt;em&gt;कम शहर होंगे, जहां हिंदू मुसलमानों की जौनपुर जैसी मिली जुली बस्ती हो, कोई मुहल्ला ऐसा नहीं, जहां दोनों न बसे हों और वह भी अलग-अलग नहीं. कम शहर होंगे, जहां साम्प्रदायिक दंगा न हुआ हो. लेकिन यहां नहीं हुआ. न आजादी के पहले, न बाद. किसने-किसने और कितनी ही कोशिश की, पर साम्प्रदायिकता नहीं भड़की यहां. न भड़केगी. कारण वही, ‘मिलल बास.’ एक दूसरे से सटकर खड़े हिन्दुओं और मुसलमानों के मकान. ऐसे सटकर बसे लोग कितना भी भड़क जायें, एक दूसरे का घर नहीं फूंक सकते.&lt;/em&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;हालांकि अजय कुमार एक जगह यह पूछकर इस स्थिति का अंदेशों से भरा ‘नया’ पहलू भी चाहे-अनचाहे दिखा ही देते हैं कि क्या बड़े पैमाने पर कत्लोगारत देखे बगैर हम ‘जौनपुर में दंगा नहीं हुआ’ यह प्रलाप बंद नहीं करेंगे? हां, जौनपुर के अभी तक दंगों से बचे रहने का कारण यह है कि दंगा अफवाहों से शुरू होता है, उन्हीं पर पनपता है. लेकिन यहां अफवाहें जड़ जमाएं तो कैसे? किसी न किसी मोड़ पर सिपाह और पुरानी बाजार (मुहल्ले) टकरा (मिल) जाते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;अंत में यह कहें बिना बात अधूरी रह जाएगी कि ‘राग जौनपुरी’ में जौनपुर के राग का ही जिक्र नहीं है, रंगमंच का भी है, खत्म हो चुके तेल व इत्र उद्योग का भी (इस शिकायत के साथ कि इन्हें छोड़ दें तो जौनपुर जीरो इंडस्ट्रियल एरिया बना हुआ है.), मदरसों का भी और मैकाले का भी, आजादी की लड़ाई में किसानों के संग्राम का भी, ‘चितरसारी’ के सरगम का भी, स्वातंत्र्य समय के बड़े-बड़े लड़वैयों का भी, ‘नन्हें-नन्हें वियतनामों’ का भी, विद्वानों, अदीबों व संगीतज्ञों का भी और उन कई का भी इब्ने मरियम हुआ करे थे जो.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;राहुल सांकृत्यायन के हवाले से उन्होंने यह दर्ज करने से भी गुरेज नहीं किया है कि समाजवाद और साम्यवाद का संदेश देने में भी जौनपुर पहला रहा है. चार्वाक भले पहले भौतिकवादी रहे हो, पहला साम्यवादी तो महदी जौनपुरी ही था, जिसने लोदी और सूत्रकाल यानी पंद्रहवीं और सोलहवीं सदी में उस समय की शहंशाहियत और सामंतवादी के खिलाफ एक तरह के साम्यवाद का प्रचार किया और इस कुसूर में अनुयायियों के साथ निर्दयता से कत्ल कर दिया गया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;em&gt;(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं.)&lt;/em&gt;&lt;/p&gt;
</description><link>https://thewirehindi.com/334949/book-review-raag-jaunpuri-by-ajay-kumar/</link><guid isPermaLink="false">https://thewirehindi.com/334949/book-review-raag-jaunpuri-by-ajay-kumar/</guid><pubDate>Fri, 07 Aug 2026 22:24:29 GMT</pubDate><author>[object Object]</author><enclosure url="https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Raag-Jaunpuri-Book-Cover.jpg" type="image/jpeg"></enclosure><itunes:image href="https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Raag-Jaunpuri-Book-Cover.jpg"></itunes:image><category>कला-साहित्य</category><category>Ajay Kumar</category><category>Art</category><category>Banaras</category><category>book review</category><category>featured</category><category>Firoz Shah Tughlaq</category><category>Ganga Jamuni culture</category><category>Hindi Literature</category><category>Hindu-Muslim unity</category><category>History</category></item><item><title>बंगनामा: वहां छात्र राजनीति कभी विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रही</title><description>&lt;p&gt;पश्चिम बंगाल में छात्र आंदोलन की सशक्त परंपरा की जड़ें स्वाधीनता संग्राम तक जाती हैं, पर आज़ादी के बाद जब विदेशी औपनिवेशिक शासन का स्थान स्वदेशी लोकतांत्रिक सरकार ने ले लिया, छात्रों के समक्ष चुनौतियां बदल गईं. यहां छात्र राजनीति की एक विशेषता यह भी रही है कि वह केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रही; खाद्यान्न संकट, श्रम अधिकार, किसानों का शोषण, अंतरराष्ट्रीय राजनीति- ये सभी छात्र आंदोलनों का हिस्सा बने.&lt;/p&gt;
&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;img src=&quot;https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Kolkata-Students-Protests-PTI.jpg&quot; alt=&quot;Kolkata Students Protests PTI&quot; style=&quot;max-width: 100%; height: auto;&quot; referrerpolicy=&quot;no-referrer&quot;&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;p style=&quot;text-align: right;&quot;&gt;&lt;em&gt;बादल सरकार के नाटक ‘जुलूस’ में शुरुआत के कुछ ही देर बाद मुन्ना के खो जाने पर मंच पर खड़ा वृद्ध पहले कोरस से और फिर दर्शकों से पूछता है, ‘पर रास्ता कहां है ? घूम-फिरकर एक ही रास्ता है. मोड़ घूम कर फिर एक ही रास्ता. जुलूस कहां है? रास्ता दिखलाने वाला जुलूस? सचमुच का सच्चा जुलूस?’&lt;/em&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;कभी जुलूसों की नगरी के नाम से प्रसिद्ध कलकत्ता में गत 20 से 25 जुलाई के बीच कई जगहों पर जब फिर जुलूसों तथा प्रदर्शनों का दौर चला तो मुझे बादल सरकार के ‘जुलूस’ और उसका यह दृश्य याद आ गए. अंततः क्या जुलूस ही रास्ता दिखाएगा? कोई सच्चा जुलूस?&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;नीट परीक्षा में साल-दर-साल हो रही गड़बड़ियों के विरुद्ध कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा दिल्ली में आरंभ किए गए आंदोलन के समर्थन में कलकत्ता में पहला जुलूस 20 जुलाई को जादवपुर विश्वविद्यालय के छात्रों ने निकाला जिसमें क़रीब 800-1000 लड़के लड़कियों ने भाग लिया. अधिकतर लोगों के हाथ में गत्ते या काग़ज़ पर हस्तलिखित व कंप्यूटर जनित पोस्टर थे, कुछ छात्र अपने-अपने संगठनों के सफ़ेद, नारंगी या लाल बैनर उठाए हुए थे और कुछ हाथों में माइक भी थे जिनकी मदद से नारे लगाए जा रहे थे.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;लिखित पोस्टर हों या कंठ स्वर, प्रमुख मांग थी केंद्रीय शिक्षा मंत्री की बर्खास्तगी की और साथ ही राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी के समापन की. कुछ छात्रों के हाथ में दिल्ली में भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक की तस्वीर थी तो कई युवा हाथ में तिरंगा लिए सिर के ऊपर लहराते चल रहे थे. प्रशासन ने पूरी व्यवस्था की थी कि जुलूस क़ाबू से बाहर न जा पाए, लेकिन शायद जुलूस के आयोजकों ने भी ठान ली थी कि वे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं होने देंगे. जुलूस पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;अगले कुछ दिनों में जैसे-जैसे दिल्ली तथा अन्य राज्यों में आंदोलन ने ज़ोर पकड़ा, कलकत्ता में भी जुलूसों तथा विरोध प्रदर्शनों की संख्या बढ़ने लगी. सोशल मीडिया के सभी प्लेटफॉर्मों पर इन जगहों के विरोध प्रदर्शनों के चित्रों, रीलों तथा संदेशों का रेला लग गया जिनसे कलकत्ता में भी आंदोलनकारी छात्रों की कार्यकलापों को गति मिली. सीजेपी ने 24 जुलाई को एक महाजुलूस तथा प्रदर्शन का आह्वान दिया जिसका कई वामपंथी छात्र संगठनों ने संग-संग समर्थन किया और हज़ारों की तादाद में छात्र-छात्राओं ने इसमें भाग लिया.&lt;/p&gt;
&lt;blockquote&gt;&lt;p&gt;इस दौर के जुलूसों और सभाओं की तीन बड़ी विशेषताएं थीं: प्रथम, एक नए, निष्पक्ष, ग़ैर-राजनीतिक छात्र/युवा संगठन के बुलावे पर कई प्रतिष्ठित छात्र संगठन इस विपुल प्रतिवाद में भाग ले रहे थे;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;द्वितीय, इस आंदोलन द्वारा युवा वर्ग एक ही साथ अपने विपन्न अधिकारों की सुरक्षा तथा राजनीतिक कार्यकारी नेतृत्व की जवाबदेही की मांग कर रहा था;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;तीन, इस आंदोलन के दौरान वृहत स्तर पर डिजिटल माध्यमों का व्यवहार किया गया – मांगों का प्रसार करने, समर्थन जुटाने, गति बनाए रखने तथा पारदर्शिता क़ायम रखने के लिए.&lt;/p&gt;&lt;/blockquote&gt;
&lt;p&gt;कुछ ऐसी ही विशिष्टताएं 2024 में कलकत्ता के छात्र आंदोलन में देखी गई थीं जब 9 अगस्त को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं हस्पताल में प्रशिक्षणरत एक महिला के साथ बलात्कार और उसकी हत्या ने देश के कोने-कोने में लोगों को सिहरा दिया था. इस घटना का सामूहिक विरोध और तिरस्कार का आरंभ किया खुद मेडिकल कॉलेजों के जूनियर चिकित्सकों तथा छात्रों ने- जो सामान्यतः पारंपरिक छात्र राजनीति से कुछ दूरी बनाए रखते थे.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;चालीस दिनों तक चलने वाले इस आंदोलन की प्रारंभिक मांग अपराधियों की गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही थी. पर शीघ्र ही यह आंदोलन परिणत हुआ सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं की सुरक्षा तथा उनके अधिकारों की रक्षा के लिए ‘रिक्लेम द नाइट’ आंदोलन में, यानी ‘रात पर अपना अधिकार वापस लो’, जिसकी प्रतिध्वनि देश के हरेक राज्य में गूंजने लगी.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;लेकिन 2024 तथा 2026 के छात्र आंदोलनों के खाके की रचना हुई थी सितंबर 2014 में- जादवपुर विश्वविद्यालय में एक छात्रा की यौन उत्पीड़न की घटना के विरुद्ध किए गए आंदोलन में. जब प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कड़ी पुलिस कार्रवाई हुई, तो यह विरोध शीघ्र ही पूरे राज्य में फैल गया.&lt;/p&gt;
&lt;blockquote&gt;&lt;p&gt;इस आंदोलन का लोकप्रिय नारा था ‘होक कोलोरोब’, यानी ‘कलरव होने दो’ या ‘आवाज़ उठने दो’. मूल मांगों के अलावा छात्रों ने विश्वविद्यालय कुलपति की जवाबदेही, प्रशासन में पारदर्शिता, यौन उत्पीड़न की निष्पक्ष जांच तथा विश्वविद्यालय की स्वायत्तता की मांग भी की थी. बंगाल में पहली बार किसी छात्र आंदोलन में मोबाइल फोन और सोशल मीडिया का प्रसार और जुटाव हेतु विस्तृत व्यवहार किया गया था.&lt;/p&gt;&lt;/blockquote&gt;
&lt;p&gt;2014, 2024 तथा 2026 के ये प्रदर्शन, जुलूस तथा धरने इस राज्य में छात्र आंदोलनों की शक्तिशाली, निरंतर चलती तथा प्रभावशाली परंपरा के नवीनतम प्रस्फुटन थे.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: center;&quot;&gt;&lt;strong&gt;§&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;यूं तो पश्चिम बंगाल में छात्र आंदोलन की इस सशक्त परंपरा की जड़ें स्वाधीनता संग्राम तक जाती हैं. लेकिन आज़ादी के बाद जब विदेशी औपनिवेशिक शासन का स्थान स्वदेशी लोकतांत्रिक सरकार ने ले लिया, तब छात्रों के समक्ष चुनौतियां बदल गईं. 1950 का दशक समस्याओं का दशक था- शरणार्थियों का पुनर्वास, बढ़ती बेरोज़गारी, महंगाई और खाद्यान्न संकट. ऐसे में कोलकाता के विश्वविद्यालय केवल शिक्षा के नहीं बल्कि राजनीतिक बहस और सामाजिक आंदोलनों के केंद्र बन गए जिनमें वामपंथी विचारधाराओं का प्रभाव प्रबल रहा.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;1959 में खाद्यान्न की भारी कमी, बढ़ती कीमतें और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की विफलताओं ने राज्य में गहरे असंतोष को जन्म दिया. छात्र संगठनों ने किसान तथा मज़दूर संगठनों के साथ मिलकर ज़बरदस्त प्रदर्शन किए- उनकी प्रमुख मांग थी राज्य के खाद्य मंत्री प्रफुल्ल चंद्र सेन का इस्तीफ़ा.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;31 अगस्त 1959 को राइटर्स बिल्डिंग की ओर बढ़ रहे खाद्य आंदोलन की विशाल भीड़ पर पुलिस ने गोली चला दी. बीसियों लोग मारे गए जिनमें छात्र भी शामिल थे. इस तरह पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में खाद्य आंदोलन एक निर्णायक मोड़ बन गया- यहां से छात्रों की एक पूरी पीढ़ी राजनीतिक कट्टरपंथी-करण की दिशा में चल पड़ी.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;1966 में खाद्यान्न संकट पुनः गहराया. इस बार आंदोलन पहले से अधिक व्यापक था. विश्वविद्यालयों के छात्र बड़ी संख्या पर रैलियों, धरनों और जुलूसों में शामिल हुए. पुलिस से लगातार होने वाली झड़पों से अनेक युवाओं का यह विश्वास गहराया कि राज्य केवल दमन के माध्यम से ही अपनी सत्ता बनाए रखना चाहता है तथा इसका विरोध गणतांत्रिक आंदोलन द्वारा नहीं किया जा सकता.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;मई 1967 दार्जिलिंग ज़िले के नक्सलबाड़ी क्षेत्र में चारु मजूमदार, कानू सान्याल और जंगल संथाल के नेतृत्व में प्रारम्भ हुए इस आंदोलन ने माओवादी विचारधारा से प्रेरित सशस्त्र क्रांति का मार्ग अपनाया. शांतिपूर्ण आंदोलन से मोहमुक्त छात्र समुदाय के लिए यह एक आकर्षक विचारधारा ही नहीं प्रेरणादायक विकल्प भी था.&amp;nbsp;अनेक छात्रों ने नक्सलवादी विचारधारा को गले लगाया और अपनी पढ़ाई छोड़ ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर किसानों के बीच काम करने लगे या शहरी क्रांतिकारी समूहों में शामिल हो गए.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;यहां छात्र राजनीति का उद्देश्य पूरी तरह बदल गया. जहां पिछले दशकों के छात्र आंदोलनों का लक्ष्य सरकारी नीतियों व प्रक्रियाओं में परिवर्तन था, नक्सलवादी छात्र भारतीय राज्य की वैधता को ही चुनौती दे रहे थे.&amp;nbsp;उनके प्राथमिक मुद्दे थे भूमि सुधार, सामाजिक न्याय, जातीय असमानता की समाप्ति और ग्रामीण शोषण का अंत. उनका विश्वास था कि इसे हासिल करने के लिए पूरी व्यवस्था को पलटना आवश्यक है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;1969 से 1972 के बीच बंगाल की छात्र राजनीति अत्यंत हिंसक हो गई. आए दिन राजनीतिक हत्याएं एवं पुलिस के साथ संघर्ष होने लगे. मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर राय की सरकार ने भी कठोरता से नक्सलवादियों का दमन करने का निर्णय लिया.&amp;nbsp;विश्वविद्यालय छात्रावासों पर छापे पड़े, हजारों युवाओं को गिरफ्तार किया गया, अनेक छात्रों को हिरासत में प्रताड़ित किया गया और कथित मुठभेड़ों में कइयों की मृत्यु हो गई. बंगाल में छात्र राजनीति का यह रक्त-रंजित चरण था.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;1975 में आपातकाल की घोषणा हुई लेकिन पश्चिम बंगाल में तो पहले से ही आपातकाल चल रहा था. राज्य में चल रहे दमन और हिंसा के कारण छात्र संगठनों की गतिविधियां काफी सीमित हो चुकी थीं. आपातकाल के दौरान छात्रों द्वारा खुले विरोध की संभावनाएं और भी कम हो गईं.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;पश्चिम बंगाल में छात्र राजनीति का अगला दौर 1977 से आरंभ हुआ, वाम मोर्चा के सत्ता में आने के बाद. एक बार फिर छात्र राजनीति का दिशा परिवर्तन हुआ. अधिकतर छात्र संगठनों ने, जो वाम विचारधारा से प्रेरित थे, अब तक सत्ता में बनी रही कांग्रेस पार्टी के विरुद्ध संग्राम किया था. उनकी करीबी वाम पार्टियों के सत्ता में आने से छात्र संघों की क्रिया-कलाप की परिधि अब विश्वविद्यालय तक सिमट गई.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;फलस्वरूप छात्र राजनीति अधिक संस्थागत होती गई. कुछ टीकाकारों ने इसे युवा संगठनों का नौकरशाही-करण, या ब्यूरोक्रटाइज़ेशन भी बताया है. विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक प्रश्न, जैसे चुनाव, दाख़िला, छात्रावास में प्रवेश, छात्रवृत्ति, पुस्तकालय, और पाठ्यक्रम इनके प्रमुख मुद्दे बन गए.&amp;nbsp;क्रांतिकारी संघर्ष की जगह विश्वविद्यालय प्रशासन में भागीदारी और प्रतिनिधित्व उनकी प्राथमिकता बन गईं तथा इन्हीं कारणों से बाद में उन पर पक्षपात, भ्रष्टाचार, तथा अन्य कुरीतियों से ग्रस्त होने के इल्ज़ाम भी लगने लगे.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;1991 के बाद आर्थिक उदारीकरण ने इस स्थिति को और बदल दिया तथा बड़ी संख्या में युवा रोजगार और व्यावसायिक शिक्षा की ओर उन्मुख होने लगे. स्वतंत्र छात्र आवाज़ कमजोर पड़ गई तथा छात्र संगठन धीरे-धीरे राजनीतिक दलों के विस्तार बनते चले गए. 2006 में सिंगूर और 2007 में नंदीग्राम से जुड़े भूमि अधिग्रहण विवादों ने पश्चिम बंगाल की छात्र राजनीति को एक बार फिर आंदोलित किया लेकिन इनसे जुड़े प्रदर्शनों में छात्र संगठन ज़्यादातर राजनीतिक दलों की बात करते दिखे, जनता की नही.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;2011 में तृणमूल कांग्रेस पार्टी के राज्य में सत्ता में आने के बाद एसएफआई जैसे वाम छात्र संगठनों तथा तृणमूल छात्र परिषद के बीच संघर्ष बढ़ा. महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय भी पार्टीगत राजनीति के अखाड़े बन गए. स्थिति इतनी बिगड़ गई कि 2017 के पश्चात अधिकतर उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;पश्चिम बंगाल की छात्र राजनीति की एक विशेषता यह रही है कि वह कभी केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रही. खाद्यान्न संकट, मजदूर अधिकार, किसानों का शोषण और अंतरराष्ट्रीय राजनीति- ये सभी विषय छात्र आंदोलनों का हिस्सा बने.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;संक्षेप में- आज का छात्र आंदोलन पहले की अपेक्षा कम वैचारिक लेकिन अधिक लोकतांत्रिक है; कम क्रांतिकारी लेकिन अधिक अधिकार-केंद्रित है; कम हिंसक लेकिन अधिक संवैधानिक है. आज छात्र आंदोलन के विषय सर्वग्राही न सही, इसके मुद्दे माकूल हैं; इसके लक्ष्य सरल हैं और डिजिटल प्रौद्योगिकी इसे अद्भुत गति देती है. यह सरलता और गति ही आज के छात्र आंदोलन की शक्ति हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;em&gt;(चन्दन सिन्हा पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी, लेखक और अनुवादक हैं.)&lt;/em&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;em&gt;(इस श्रृंखला के सभी लेख पढ़ने के लिए&amp;nbsp;&lt;a href=&quot;https://thewirehindi.com/tag/bangnama/&quot;&gt;यहां क्लिक करें.&lt;/a&gt;)&amp;nbsp;&lt;/em&gt;&lt;/p&gt;
</description><link>https://thewirehindi.com/334917/bangnama-culture-of-protest-in-bengal/</link><guid isPermaLink="false">https://thewirehindi.com/334917/bangnama-culture-of-protest-in-bengal/</guid><pubDate>Fri, 07 Aug 2026 21:54:31 GMT</pubDate><author>[object Object]</author><enclosure url="https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Kolkata-Students-Protests-PTI.jpg" type="image/jpeg"></enclosure><itunes:image href="https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Kolkata-Students-Protests-PTI.jpg"></itunes:image><category>कला-साहित्य</category><category>विशेष</category><category>Bangnama</category><category>CJP protests</category><category>Culture Of Protest</category><category>featured</category><category>Freedom Struggle</category><category>jadavpur university</category><category>kolkata presidency college</category><category>Kolkata RG Kar Medical College and Hospital</category><category>kolkata Students Politics</category><category>Left Organisations</category></item><item><title>झारखंड छात्र आंदोलन: सीएम सोरेन बोले- हम बातचीत को तैयार; आइसा नेता नेहा पर फेंकी गई...</title><description>&lt;p&gt;झारखंड में परीक्षा सुधार को लेकर चल रहे विरोध प्रदशन के दौरान एक व्यक्ति ने आइसा नेता नेहा बोरा और अन्य महिला प्रदर्शनकारियों पर स्याही फेंक दी, जिससे कुछ समय के लिए प्रदर्शन बाधित हो गया. इसी बीच 4 अगस्त की रात से अनशन कर रहे राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें एंबुलेंस से रांची सदर अस्पताल ले जाया गया.&lt;/p&gt;
&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;img src=&quot;https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Neha-Bora.jpg&quot; alt=&quot;Neha Bora&quot; style=&quot;max-width: 100%; height: auto;&quot; referrerpolicy=&quot;no-referrer&quot;&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;नई दिल्ली: &lt;/b&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;रांची में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) और झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की प्रारंभिक परीक्षा के खिलाफ &lt;/span&gt;&lt;a href=&quot;https://thewire.in/rights/jharkhand-exam-protests-congress-offers-support-cm-says-ready-to-talk-hunger-striker-taken-to-hospital&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;प्रदर्शन&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt; जारी है. इस आंदोलन को कांग्रेस, कॉकरोच जनता पार्टी और छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) का समर्थन मिला है.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;इस आंदोलन के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि उनकी सरकार प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत के लिए तैयार है. उनके हवाले से कहा गया, ‘हमने पहले ही बातचीत का माध्यम तय कर दिया है. हम बातचीत के लिए तैयार हैं. सरकार हर छात्र की समस्या को समझना चाहती है. अब हम छात्रों की मांगों को जयपाल सिंह स्टेडियम की सीमाओं से आगे ले जाने की कोशिश कर रहे हैं.’&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;फिलहाल छह प्रदर्शनकारी आमरण अनशन पर बैठे हैं.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;https://www.thehindu.com/news/national/jharkhand/jharkhand-exam-irregularities-student-protest-youth-unemployment-updates-on-august-7-2026/article71316373.ece&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;द हिंदू की रिपोर्ट&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt; के अनुसार, 4 अगस्त की रात से अनशन कर रहे राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ने पर शुक्रवार को उन्हें एंबुलेंस से रांची सदर अस्पताल ले जाया गया. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शुक्रवार सुबह प्रदर्शनस्थल पर कोई डॉक्टर नहीं पहुंचा.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;इसी बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चले आंदोलन में 23 दिनों तक भूख हड़ताल पर रहीं आइसा नेता नेहा बोरा ने शुक्रवार को रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचकर अनशन पर बैठे प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;इस दौरान एक व्यक्ति ने नेहा बोरा और अन्य महिला प्रदर्शनकारियों पर स्याही फेंक दी, जिससे कुछ समय के लिए प्रदर्शन बाधित हो गया. बताया गया है कि&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;स्याही फेंकने वाले व्यक्ति को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;figure id=&quot;attachment_334924&quot; aria-describedby=&quot;caption-attachment-334924&quot; style=&quot;width: 760px&quot; class=&quot;wp-caption aligncenter&quot;&gt;&lt;img fetchpriority=&quot;high&quot; class=&quot;wp-image-334924 &quot; src=&quot;https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Ink-thrown-at-Neha-Bora.jpg&quot; alt=&quot;&quot; width=&quot;760&quot; height=&quot;542&quot; srcset=&quot;https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Ink-thrown-at-Neha-Bora.jpg 808w, https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Ink-thrown-at-Neha-Bora-300x214.jpg 300w, https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Ink-thrown-at-Neha-Bora-768x547.jpg 768w, https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Ink-thrown-at-Neha-Bora-480x342.jpg 480w&quot; sizes=&quot;(max-width: 760px) 100vw, 760px&quot; referrerpolicy=&quot;no-referrer&quot;&gt;&lt;figcaption id=&quot;caption-attachment-334924&quot; class=&quot;wp-caption-text&quot;&gt;स्याही फेंकने वाले व्यक्ति को ले जाती पुलिस. (फोटो: पीटीआई)&lt;/figcaption&gt;&lt;/figure&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;आइसा ने आरोप लगाया कि यह घटना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े लोगों द्वारा नेहा बोरा के आंदोलन में शामिल होने के खिलाफ चलाए जा रहे ‘दुष्प्रचार और नफरत अभियान’ का नतीजा है.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;ज्ञात रहे कि झारखंड में भाजपा विपक्ष में है.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;यह आंदोलन दो संगठनों- जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के नेतृत्व में चल रहा है. झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के देवेंद्र नाथ महतो पिछले छह दिनों से भूख हड़ताल पर हैं.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;प्रदर्शनकारी 14वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द करने और जेएसएससी में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;प्रदर्शनकारियों की तीन प्रमुख मांगें हैं:&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;ol&gt;
&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt; झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा को तत्काल रद्द किया जाए और प्रश्नपत्र लीक के आरोपों की सीबीआई जांच कराई जाए.&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;
&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt; 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) प्रारंभिक परीक्षा और बैकलॉग भर्ती प्रक्रिया को रद्द किया जाए तथा अभय तिवारी सहित अन्य लोगों की कथित संलिप्तता की सीबीआई जांच कराई जाए.&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;
&lt;li&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt; जेएसएससी और जेपीएससी की भर्ती प्रणाली में व्यापक सुधार किए जाएं.&lt;/span&gt;&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;इस बीच, झारखंड सरकार के मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत होगी.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;उन्होंने कहा, ‘सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा रहा है. बातचीत होगी और आज से चर्चा शुरू होने की उम्मीद है.’&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;गुरुवार को कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने भी झारखंड में अपने सहयोगी हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ चल रहे इस आंदोलन का समर्थन किया. कांग्रेस ने जेपीएससी की परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के पक्ष में बयान दिया.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;बता दें कि 2 जुलाई को 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि आयोग ने श्रेणीवार कट-ऑफ अंक, अभ्यर्थियों के व्यक्तिगत अंक और आधिकारिक ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन (ओएमआर) आंसर की जारी नहीं की.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;ख़बरों के अनुसार, यह आंदोलन भर्ती परीक्षाओं में वर्षों से सामने आती रही अनियमितताओं और बार-बार हुई चूकों के खिलाफ बढ़ते असंतोष का परिणाम है.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
</description><link>https://thewirehindi.com/334927/ink-thrown-at-aisa-leader-neha-bora-in-jharkhand-student-protest/</link><guid isPermaLink="false">https://thewirehindi.com/334927/ink-thrown-at-aisa-leader-neha-bora-in-jharkhand-student-protest/</guid><pubDate>Fri, 07 Aug 2026 04:48:04 GMT</pubDate><author>[object Object]</author><enclosure url="https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Neha-Bora.jpg" type="image/jpeg"></enclosure><itunes:image href="https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Neha-Bora.jpg"></itunes:image><category>कैंपस</category><category>AISA</category><category>AISA leader Neha Bora</category><category>BJP</category><category>CM Hemant Soren</category><category>Cockroach Janata Party</category><category>Congress</category><category>featured</category><category>Jharkhand Public Service Commission (JPSC)</category><category>Jharkhand Staff Selection Commission (JSSC)</category><category>Jharkhand Students Protest</category></item><item><title>सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा का पुलिस के सामने ऑनलाइन पेश होने का आग्रह ठुकराया</title><description>&lt;p&gt;तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की सोशल मीडिया पर टिप्पणियों को लेकर पश्चिम बंगाल पुलिस ने एक भाजपा नेता की शिकायत के आधार पर उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है. हाईकोर्ट ने इस बाबत उन्हें जांच अधिकारी के सामने पेश होने को कहा था. मोइत्रा ने थाने जाने पर हमला किए जाने की आशंका जताते हुए सुप्रीम कोर्ट से वहां वर्चुअली पेश होने की अनुमति मांगी थी. कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया.&lt;/p&gt;
&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;img src=&quot;https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Mahua-Moitra-PTI05_10_2025_000274A-scaled-1-e1786098179955.jpg&quot; alt=&quot;Mahua Moitra PTI05_10_2025_000274A-scaled&quot; style=&quot;max-width: 100%; height: auto;&quot; referrerpolicy=&quot;no-referrer&quot;&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नई दिल्ली:&lt;/strong&gt; सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (7 अगस्त) को तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने पुलिस के सामने वर्चुअली (ऑनलाइन) पेश होने की &lt;a href=&quot;https://thewire.in/law/sc-declines-mahua-moitras-request-to-appear-virtually-before-io-over-concerns-of-egg-attack&quot;&gt;अनुमति देने का निर्देश देने की मांग की&lt;/a&gt; थी.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;मोइत्रा ने अपनी याचिका में आशंका जताई थी कि अगर वह पुलिस थाने जाती हैं तो उन पर अंडे फेंके जा सकते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;https://www.barandbench.com/news/you-are-in-politics-and-fear-eggs-freedom-fighters-took-bullets-supreme-court-refuses-relief-to-mahua-moitra&quot;&gt;बार एंड बेंच&lt;/a&gt; की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने सांसद की चिंताओं को खारिज कर दिया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;जस्टिस दत्ता ने कहा, ‘आप संसद सदस्य हैं? राजनीति में उतरने के बाद आपको अंडों से डर लगता है? जबकि हमारे आज़ादी की लड़ाई लड़ने वालों ने सीने पर गोलियां खाई थीं? ऐसी अर्जियां इस कोर्ट के सामने बिल्कुल नहीं आनी चाहिए.’&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;कृष्णानगर से सांसद मोइत्रा के खिलाफ पश्चिम बंगाल पुलिस ने एक भाजपा नेता की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है. यह शिकायत सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए दो वीडियो में उनकी टिप्पणियों को लेकर की गई थी, जिसके बाद कथित तौर पर भाजपा समर्थक कृष्णानगर में एक कोर्ट के बाहर उन पर अंडे और टमाटर फेंकने के लिए जमा हुए थे.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने मोइत्रा की एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका पर उन्हें अंतरिम संरक्षण दिया था और उन्हें 14 अगस्त को जांच अधिकारी (आईओ) के सामने पेश होने का निर्देश दिया था.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;मोइत्रा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि सांसद को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जांच अधिकारी के सामने पेश होने की अनुमति दी जानी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग पर सवाल उठाया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;अदालत ने पूछा, ‘वर्चुअली क्यों? क्योंकि आप सांसद हैं?’&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इस पर शंकरनारायणन ने कहा, ‘कानून के तहत मुझे इसका अधिकार है. पुलिस के नोटिस के अनुसार मुझे अपने ही निर्वाचन क्षेत्र के पुलिस थाने में उपस्थित होना है. पिछली बार जब मैं वहां गई थी, तब दो चीजें हुई थीं. पहली, धमकी दी गई थी कि अंडे फेंके जाएंगे आदि, और दूसरी बार वास्तव में अंडे फेंके गए थे.’&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;उन्होंने कहा कि मोइत्रा को आशंका है कि अगर वह व्यक्तिगत रूप से पुलिस के सामने पेश होती हैं तो भीड़ उन पर हमला कर सकती है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;हालांकि, अदालत इस दलील से संतुष्ट नहीं हुई और कहा कि हाईकोर्ट पहले ही मोइत्रा को जांच एजेंसी के साथ सहयोग करने का निर्देश दे चुका है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;बार एंड बेंच के अनुसार, अदालत ने कहा, ‘चुनौती दिए गए आदेश के पैराग्राफ 19 को पढ़िए. आप पेश नहीं होते हैं. और फिर हाईकोर्ट के सामने इसके परिणाम भुगतिए. अगर आपको कोई शिकायत है, तो आएं.’&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इसके बाद शंकरनारायणन ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को वापस ली गई मानकर खारिज कर दिया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ज्ञात हो कि पिछले महीने मोइत्रा ने &lt;a href=&quot;https://thewire.in/news/eggs-hurled-at-cpi-m-leader-minakshi-mukherjee&quot;&gt;कुछ तस्वीरें और वीडियो&lt;/a&gt; साझा किए थे, जिनमें उन्होंने कहा था कि अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक पार्टी बैठक करने के दौरान उन्हें बाहर मौजूद भाजपा के झंडे लिए लोगों की ओर से पत्थरों और अंडों से हमले का सामना करना पड़ा. इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी और कुणाल घोष पर भी अंडे फेंके जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं.&lt;/p&gt;
</description><link>https://thewirehindi.com/334906/sc-declines-mahua-moitras-request-to-appear-virtually-before-io-over-concerns-of-egg-attack/</link><guid isPermaLink="false">https://thewirehindi.com/334906/sc-declines-mahua-moitras-request-to-appear-virtually-before-io-over-concerns-of-egg-attack/</guid><pubDate>Fri, 07 Aug 2026 04:25:05 GMT</pubDate><author>[object Object]</author><enclosure url="https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Mahua-Moitra-PTI05_10_2025_000274A-scaled-1-e1786098179955.jpg" type="image/jpeg"></enclosure><itunes:image href="https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Mahua-Moitra-PTI05_10_2025_000274A-scaled-1-e1786098179955.jpg"></itunes:image><category>राजनीति</category><category>BJP</category><category>Calcutta High Court</category><category>featured</category><category>Krishnanagar</category><category>Mahua Moitra</category><category>News</category><category>Supreme Court</category><category>The Wire Hindi</category><category>Trinamool congress</category><category>West Bengal Police</category></item><item><title>एनटीए के अपने विशेषज्ञों ने पैसों के लिए कराया नीट-यूजी पेपर लीक: सीबीआई चार्जशीट म...</title><description>&lt;p&gt;नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई की चार्जशीट ने कई बड़े खुलासे किए हैं. जांच एजेंसी का दावा है कि यह कोई साधारण पेपर लीक नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैला सुनियोजित नेटवर्क था. इस मामले में सीबीआई ने 13 आरोपियों को नामजद किया है जिनमें एनटीए के तीन विषय विशेषज्ञ भी शामिल हैं.&lt;/p&gt;
&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;img src=&quot;https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/05/Neet-Protest-PTI-Photo.jpg&quot; alt=&quot;Neet Protest PTI Photo&quot; style=&quot;max-width: 100%; height: auto;&quot; referrerpolicy=&quot;no-referrer&quot;&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नई दिल्ली:&lt;/strong&gt; नीट-अंडर ग्रेजुएट (यूजी) 2026 के कथित पेपर लीक मामले में सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि यह एक सुनियोजित, कई राज्यों से जुड़े आपराधिक साजिश का नतीजा था, जिसमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के विषय विशेषज्ञों ने कथित तौर पर परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र लीक किए. इन प्रश्नों को कोचिंग संचालकों, दलालों और बिचौलियों के नेटवर्क के जरिए बड़ी रकम लेकर अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;https://www.newindianexpress.com/india/2026/Aug/07/nta-experts-turned-conspirators-cbi-charges-13-in-multi-state-ug-2026-paper-leak-syndicate&quot;&gt;न्यू इंडियन एक्सप्रेस&lt;/a&gt; की रिपोर्ट के मुताबिक, सीबीआई ने राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत में &lt;a href=&quot;https://thewirehindi.com/334178/cbi-chargesheets-13-accused-in-2026-neet-ug-leak-case/&quot;&gt;आरोपपत्र दाखिल&lt;/a&gt; किया है, जिसमें 13 आरोपियों के नाम शामिल हैं. इनमें एनटीए द्वारा नियुक्त तीन विषय विशेषज्ञ, कोचिंग संचालक, बिचौलिए और अभ्यर्थी शामिल हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इन सभी आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत आरोप लगाए गए हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;आरोपपत्र के अनुसार, साजिश की शुरुआत एनटीए के तीन विषय विशेषज्ञों – वनस्पति विज्ञान विशेषज्ञ मनीषा गुरुनाथ मंडारे (ए-1), रसायन विज्ञान विशेषज्ञ प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी (ए-2) और भौतिकी विशेषज्ञ मनीषा संजय हवालदार (ए-3) – से हुई.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;सीबीआई का आरोप है कि इन तीनों ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए परीक्षा से पहले नीट-यूजी 2026 के गोपनीय प्रश्नपत्रों तक अनधिकृत पहुंच हासिल की और उन्हें सिंडिकेट के सदस्यों के साथ साझा किया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;सीबीआई का मानना है कि इसके बाद लीक प्रश्नपत्र तेजस शाह (ए-4), शिवराज मोटेगांवकर (ए-5), डॉ. मनोज शिरुरे (ए-6), मनीषा संजय वाघमारे (ए-7), धनंजय लोखंडे (ए-8), शुभम मधुकर खैरनार (ए-9), यश यादव (ए-10), मंगलीलाल बिवाल (ए-11), दिनेश बिवाल (ए-12) और विकास बिवाल (ए-13) के माध्यम से संचालित एक संगठित नेटवर्क के जरिए आगे पहुंचाए गए.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;आरोप है कि इन सभी ने प्रश्नपत्रों के प्रसार और भुगतान की व्यवस्था में अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;जांच में पता चला है कि परीक्षा से कई दिन पहले गोपनीय प्रश्नपत्र पीडीएफ और इमेज प्रारूप में टेलीग्राम और वॉट्सऐप जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए साझा किए गए.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;सीबीआई के अनुसार, जब्त किए गए मोबाइल फोन, पेन ड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच में ऐसे डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनसे कई आरोपियों के बीच लीक प्रश्नपत्रों के आदान-प्रदान का पता चलता है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;एजेंसी ने प्रश्नपत्रों के कथित प्रसार की पूरी श्रृंखला का पुनर्निर्माण किया है. उसके मुताबिक, मंगलीलाल बिवाल (ए-11) को यश यादव (ए-10) से टेलीग्राम के जरिए लीक प्रश्न मिले थे.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;आरोप है कि बिवाल ने इस सौदे की सुरक्षा के तौर पर यश यादव के एक सहयोगी को अपनी 10वीं और 12वीं की मूल अंकतालिकाएं तथा हस्ताक्षरित खाली चेक सौंपा था. आरोपपत्र में बताया गया है कि ये दस्तावेज बाद में तलाशी के दौरान बरामद किए गए.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;जांचकर्ताओं का यह भी आरोप है कि यश यादव को लीक प्रश्नपत्र नासिक के आरोपी शुभम मधुकर खैरनार (ए-9) से मिले. यश यादव के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच में ‘एपी ब्रोकर’ नाम से सेव संपर्क, जिसे खैरनार बताया गया है, के साथ हुई चैट और लीक नीट प्रश्नों वाली पीडीएफ फाइलें मिलने का दावा किया गया है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;सीबीआई के अनुसार, खैरनार ने धनंजय लोखंडे (ए-8) से कथित तौर पर 25 लाख रुपये में लीक प्रश्नपत्र हासिल किए. पूछताछ के दौरान खैरनार ने इस वित्तीय लेनदेन की जानकारी दी थी.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;जांच में आगे दावा किया गया है कि लोखंडे को लीक प्रश्नपत्र मनीषा संजय वाघमारे (ए-7) से मिले, जिन्होंने कथित तौर पर बिचौलियों के जरिए प्रश्नपत्रों की हार्ड कॉपी उपलब्ध कराई. वाघमारे के घर पर तलाशी के दौरान जांचकर्ताओं ने एक मोबाइल फोन बरामद किया, जिसमें ‘नीट- 2026’ नाम का एक वॉट्सऐप समूह मिला. एजेंसी इसे महत्वपूर्ण साक्ष्य मान रही है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;आरोपपत्र में यह भी कहा गया है कि वाघमारे का संपर्क एनटीए के रसायन विज्ञान विशेषज्ञ प्रह्लाद कुलकर्णी (ए-2) से था, जिन्होंने नीट-यूजी 2026 के रसायन विज्ञान प्रश्नपत्र का मराठी से अंग्रेजी में बैक-ट्रांसलेशन किया था. सीबीआई का आरोप है कि वाघमारे ने मंडारे और कुलकर्णी से परिचित कराए गए छात्रों के माध्यम से जीवविज्ञान और रसायन विज्ञान के लीक प्रश्न हासिल किए.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;एजेंसी ने जांच के दौरान दर्ज अभ्यर्थियों के बयान भी आरोपपत्र में शामिल किए हैं. इसके अनुसार, एक अभ्यर्थी और उसके पिता को कथित तौर पर 4 लाख रुपये में नीट-यूजी 2026 का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने की पेशकश की गई थी.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इसके साथ एनटीए के एक विषय विशेषज्ञ द्वारा कराई जाने वाली कोचिंग और ऑफलाइन रिवीजन कक्षाओं का भी प्रस्ताव दिया गया था. सीबीआई का कहना है कि ये घटनाएं 2025 के उत्तरार्ध और 2026 की शुरुआत में व्यापक साजिश के तहत हुईं.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;सीबीआई का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच, बरामद दस्तावेज, चैट रिकॉर्ड और गवाहों के बयान सामूहिक रूप से इस कथित आपराधिक साजिश, लोक सेवकों द्वारा पद के दुरुपयोग और नीट-यूजी 2026 परीक्षा से पहले गोपनीय परीक्षा सामग्री के अवैध प्रसार को स्थापित करते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;सीबीआई ने यह आरोपपत्र विशेष सीबीआई अदालत में दाखिल कर दिया है. अब अदालत उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करेगी और यह तय करेगी कि मामले का संज्ञान लिया जाए या नहीं.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;गौरतलब है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा तीन मई को आयोजित की गई नीट अंडर ग्रेजुएट (यूजी) 2026 की&lt;a href=&quot;https://thewirehindi.com/329063/neet-leak-raises-questions-over-entire-system/&quot;&gt; परीक्षा पेपर लीक&lt;/a&gt; के दावों के बाद रद्द कर दी गई थी, जिसके बाद यह परीक्षा दोबारा 21 जून को आयोजित की गई. इस पेपर लीक ने देशभर में युवाओं को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया था, जिसके बाद राजधानी&lt;a href=&quot;https://thewirehindi.com/334739/harassed-for-supporting-cockroaches-police-intimidate-restaurants-for-delivering-to-jantar-mantar/&quot;&gt; दिल्ली के जंतर-मंतर&lt;/a&gt; पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में महीनेभर लंबा आंदोलन चला और आखिरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा.&lt;/p&gt;
</description><link>https://thewirehindi.com/334910/nta-experts-turned-conspirators-cbi-charges-13-in-multi-state-ug-2026-paper-leak-syndicate/</link><guid isPermaLink="false">https://thewirehindi.com/334910/nta-experts-turned-conspirators-cbi-charges-13-in-multi-state-ug-2026-paper-leak-syndicate/</guid><pubDate>Fri, 07 Aug 2026 03:27:24 GMT</pubDate><author>[object Object]</author><enclosure url="https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/05/Neet-Protest-PTI-Photo.jpg" type="image/jpeg"></enclosure><itunes:image href="https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/05/Neet-Protest-PTI-Photo.jpg"></itunes:image><category>भारत</category><category>2026 NEET-UG Leak Case</category><category>Central Bureau of Investigation (CBI</category><category>featured</category><category>National Testing Agency (NTA)</category><category>News</category><category>NTA-appointed subject experts</category><category>paper leak syndicate</category><category>The Wire Hindi</category></item><item><title>पन्नू के सुनवाई में शामिल होने के अनुरोध के बाद अमेरिकी अदालत ने निखिल गुप्ता की सज...</title><description>&lt;p&gt;अमेरिकी अभियोजकों का आरोप है कि निखिल गुप्ता ने न्यूयॉर्क में गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रचने के लिए विकास यादव के निर्देश पर काम किया था. अमेरिकी अदालत में दाखिल दस्तावेजों में विकास यादव को भारत की खुफिया एजेंसी रॉ का पूर्व कर्मचारी बताया गया है. बताया गया है कि गुप्ता ने उन पर लगे आरोपों को स्वीकार कर लिया है, और अब अदालत द्वारा उन्हें सज़ा सुनाई जानी है.&lt;/p&gt;
&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;img src=&quot;https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Nikhil-Gupta-.png&quot; alt=&quot;Nikhil Gupta&quot; style=&quot;max-width: 100%; height: auto;&quot; referrerpolicy=&quot;no-referrer&quot;&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;नई दिल्ली: &lt;/b&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;अमेरिका की एक संघीय अदालत ने निखिल गुप्ता को सजा सुनाए जाने की सुनवाई &lt;/span&gt;&lt;a href=&quot;https://thewire.in/world/us-court-delays-nikhil-gupta-sentencing-after-pannun-seeks-to-attend-hearing&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;टाल&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt; दी है. अभियोजकों ने अदालत को बताया कि कथित हत्या की साजिश का निशाना बने व्यक्ति सजा सुनाए जाने की प्रक्रिया में हिस्सा लेना चाहते हैं. इसके बाद अदालत ने सुनवाई नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;हालांकि अदालत में दाखिल दस्तावेजों में कथित पीड़ित का नाम नहीं है, लेकिन प्रतिबंधित संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू के वकील सार्वजनिक रूप से &lt;/span&gt;&lt;a href=&quot;https://www.nytimes.com/2023/11/30/nyregion/india-assassination-target-sikh-activist.html&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;कह&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt; चुके हैं कि कथित हत्या की साजिश का निशाना पन्नू ही थे.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले की अमेरिकी जिला अदालत में दाखिल एक पत्र में अभियोजकों ने कहा कि पीड़ित ‘सजा सुनाए जाने की कार्यवाही में हिस्सा लेना चाहते हैं.’ &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि 25 सितंबर को प्रस्तावित सुनवाई स्थगित कर दी जाए, क्योंकि उस समय पीड़ित अमेरिका से बाहर रहेंगे.&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;जस्टिस विक्टर मरेरो ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए निखिल गुप्ता को सजा सुनाए जाने की सुनवाई 20 नवंबर सुबह 10 बजे तय कर दी.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;बताया गया है कि निखिल गुप्ता ने फरवरी में भाड़े पर हत्या (मर्डर-फॉर-हायर) कराने की साजिश, मर्डर-फॉर-हायर कराने और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश के &lt;/span&gt;&lt;a href=&quot;https://thewire.in/world/nikhil-gupta-pleads-guilty-in-us-to-plot-to-kill-gurpatwant-singh-pannun&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;आरोप स्वीकार&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt; कर लिए थे. इसके साथ ही मार्च में प्रस्तावित मुकदमे की सुनवाई टल गई थी.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;गुप्ता को अधिकतम 40 वर्ष की जेल की सजा हो सकती है. जून 2024 में चेक गणराज्य से प्रत्यर्पण के बाद से वह अमेरिका की हिरासत में हैं.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;अमेरिकी अभियोजकों का आरोप है कि गुप्ता ने विकास यादव के निर्देश पर न्यूयॉर्क में पन्नू की हत्या की साजिश रची थी. अमेरिकी अदालत में दाखिल दस्तावेजों में विकास यादव को भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) का पूर्व कर्मचारी बताया गया है.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;अक्टूबर 2024 में विकास यादव के खिलाफ भी मर्डर-फॉर-हायर और मनी लॉन्ड्रिंग समेत कई आरोपों में अभियोग (इंडिक्टमेंट) दायर किया गया था.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;इसके बाद भारत सरकार ने स्वीकार किया था कि विकास यादव पहले सरकार के लिए काम कर चुके थे. हालांकि सरकार का कहना था कि जब अमेरिकी अदालत में उनके खिलाफ आरोपपत्र सार्वजनिक किया गया, तब तक वह सरकारी सेवा में नहीं थे. फिलहाल भारत में उनका ठिकाना सार्वजनिक रूप से ज्ञात नहीं है.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;निखिल गुप्ता के खिलाफ दायर मूल आरोपपत्र में जून 2023 में कनाडा में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का भी उल्लेख किया गया था.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;अभियोजकों के अनुसार, निज्जर की हत्या के एक दिन बाद गुप्ता ने अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसी के उस अंडरकवर अधिकारी से, जो कथित तौर पर सुपारी किलर बनकर उनसे संपर्क में था, कहा था कि ‘निज्जर भी निशाना था’ और अब कथित लक्ष्य की हत्या के लिए ‘इंतजार करने की जरूरत नहीं है.’&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;आरोपपत्र में यह भी कहा गया था कि लगभग उसी समय विकास यादव ने गुप्ता को कथित लक्ष्य से जुड़ी एक समाचार रिपोर्ट भेजी और कहा, ‘अब यह प्राथमिकता है.’&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;हालांकि, पिछले महीने अमेरिकी अधिकारियों ने एक अलग आरोपपत्र सार्वजनिक किया, जिसमें जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके कई कथित सहयोगियों पर कनाडा में निज्जर की हत्या की साजिश रचने का &lt;/span&gt;&lt;a href=&quot;https://thewire.in/security/us-indicts-lawrence-bishnoi-for-allegedly-ordering-hardeep-nijjars-killing&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;आरोप&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt; लगाया गया.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;font-weight: 400;&quot;&gt;निखिल गुप्ता और विकास यादव के मामलों के विपरीत, लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े आरोपपत्र में यह आरोप नहीं लगाया गया है कि भारत सरकार के किसी अधिकारी ने इस साजिश का निर्देश दिया था या उसमें भागीदारी की थी. इसमें इस कथित साजिश के लिए बिश्नोई के अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क को जिम्मेदार ठहराया गया है.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
</description><link>https://thewirehindi.com/334896/us-court-delays-nikhil-gupta-sentencing-after-pannun-seeks-to-attend-hearing/</link><guid isPermaLink="false">https://thewirehindi.com/334896/us-court-delays-nikhil-gupta-sentencing-after-pannun-seeks-to-attend-hearing/</guid><pubDate>Fri, 07 Aug 2026 02:57:42 GMT</pubDate><author>[object Object]</author><enclosure url="https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Nikhil-Gupta-.png" type="image/jpeg"></enclosure><itunes:image href="https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Nikhil-Gupta-.png"></itunes:image><category>दुनिया</category><category>featured</category><category>Gurpatwant Singh Pannun</category><category>Khalistani separatist Hardeep Singh Nijjar</category><category>Lawrence Bishnoi</category><category>Murder for Hire</category><category>NEW YORK</category><category>News</category><category>Nikhil Gupta</category><category>Pannun</category><category>Research and Analysis Wing (RAW)</category></item><item><title>यूपीआई लेनदेन पर बैंकों को शुल्क लगाने की अनुमति देने वाला विधेयक लोकसभा से पारित</title><description>&lt;p&gt;लोकसभा ने बिना बहस के एक विधेयक पारित किया है, जिससे केंद्र सरकार भविष्य में बैंकों और अन्य सेवा प्रदाताओं को यूपीआई व अन्य डिजिटल भुगतान सेवाओं पर शुल्क लगाने की अनुमति दे सकेगी. कांग्रेस और माकपा ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इससे मुफ्त यूपीआई लेनदेन की वैधानिक गारंटी खत्म हो जाएगी.&lt;/p&gt;
&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;img src=&quot;https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/high-1.jpg&quot; alt=&quot;Nirmala sitaraman&quot; style=&quot;max-width: 100%; height: auto;&quot; referrerpolicy=&quot;no-referrer&quot;&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नई दिल्ली:&lt;/strong&gt; लोकसभा ने गुरुवार (6 अगस्त) को एक विधेयक पारित किया, जिससे केंद्र सरकार बैंकों और अन्य सेवा प्रदाताओं को यूपीआई और अन्य डिजिटल भुगतान लेनदेन पर शुल्क लगाने की अनुमति दे सकेगी.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;कराधान तथा अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026, जिसके जरिए सरकार ने भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में भी संशोधन किया, लोकसभा में बिना किसी बहस के ध्वनिमत से पारित हो गया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;https://thewire.in/banking/lok-sabha-passes-bill-allowing-govt-to-permit-banks-others-to-charge-customers-for-upi-transactions&quot;&gt;रिपोर्ट&lt;/a&gt; के मुताबिक, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को दोपहर 2 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद यह विधेयक पेश किया था. विपक्ष के हंगामे के बीच बिना किसी चर्चा के इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इस दौरान विपक्षी सांसद अयोध्या के राम मंदिर में हुई चोरी और युवा प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के दो सप्ताह से अधिक समय बाद भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सदन में मौजूद न होने को लेकर नारेबाजी करते रहे.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;यूपीआई पर शुल्क से जुड़ी रोक हटाई गई&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;उल्लेखनीय है कि अब तक पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A के तहत बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 269SU के तहत निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों के इस्तेमाल पर किसी भी तरह का शुल्क लेने से रोका गया था.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इसको साथ ही आयकर अधिनियम की धारा 269SU के अनुसार 50 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक कारोबार वाले व्यवसायों के लिए रुपेय डेबिट कार्ड और भीम-यूपीआई क्यूआर कोड समेत कुछ इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम स्वीकार करना अनिवार्य था.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;संशोधन के तहत धारा 10A में यह प्रावधान बदल दिया गया है. अब कानून में ‘आयकर अधिनियम की धारा 269SU के तहत निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों’ की जगह ‘केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना के जरिए निर्दिष्ट एक या अधिक इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम’ शब्द शामिल किए गए हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इस बदलाव के साथ वह कानूनी प्रावधान भी हट गया है, जो बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को व्यापारी छूट दर (एमडीआर) या अन्य शुल्क लगाने से रोकता था. अब केंद्र सरकार चाहे तो अधिसूचना जारी कर बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और भुगतान अवसंरचना (पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर) कंपनियों को डिजिटल भुगतान सेवाओं पर उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों से शुल्क लेने की अनुमति दे सकती है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;काफी समय से बैंक और उद्योग जगत यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लागू करने की मांग कर रहे हैं. उनका तर्क है कि यूपीआई के लगातार बढ़ते उपयोग के कारण भुगतान अवसंरचना की लागत भी बढ़ रही है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;हालांकि, संजय मल्होत्रा ने बुधवार को समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा था कि डिजिटल भुगतान पर एमडीआर लागू करने पर चर्चा करना फिलहाल ‘जल्दबाज़ी’ होगी. उन्होंने कहा कि भुगतान जैसी सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना में निवेश आवश्यक है और इसकी लागत किसी न किसी को वहन करनी होगी.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;विदेशी निवेशकों और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को भी राहत&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इस विधेयक के जरिए 5 जून को जारी उस अध्यादेश का भी स्थान ले लिया गया है, जिसमें सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को मिलने वाली ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर कर राहत दी गई थी.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इसके अलावा भारत में अपने संचालन स्थानांतरित करने वाले फंड मैनेजरों के लिए भी नियमों में ढील दी गई है, ताकि उनकी वैश्विक आय पर भारत में कर लगाने की आशंका कम हो.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि भारत में मोबाइल फोन, लैपटॉप, पर्सनल कंप्यूटर, टैबलेट, सर्वर और उनके पुर्जों के निर्माण के लिए भारतीय कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स के साथ काम करने वाली विदेशी कंपनियों को मिलने वाली आयकर छूट को वित्त वर्ष 2040-41 तक बढ़ा दिया गया है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इस बीच डिजिटल भुगतान पर लेनदेन शुल्क का रास्ता खोलने वाले विधेयक का &lt;a href=&quot;https://www.telegraphindia.com/india/upi-charges-row-congress-cpm-oppose-bill-allowing-merchant-discount-rate-on-payments-prnt/cid/2173730&quot;&gt;कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने&lt;/a&gt; किया विरोध है.&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;280&quot; data-end=&quot;441&quot;&gt;कांग्रेस के संचार विभाग प्रमुख और सांसद जयराम रमेश ने कहा कि इस विधेयक के पारित होने से यूपीआई लेनदेन को मुफ्त बनाए रखने वाली वैधानिक गारंटी समाप्त हो जाती है.&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;443&quot; data-end=&quot;783&quot;&gt;उन्होंने कहा, ‘यह व्यापारी छूट दर (एमडीआर) शुल्क लगाए जाने का रास्ता खोलता है, जिसे भविष्य में सभी प्रकार के भुगतानों तक आसानी से बढ़ाया जा सकता है. इसका बोझ अंततः आम लोगों पर पड़ेगा, जिन्हें अब यूपीआई के जरिए भुगतान करने के लिए शुल्क देना होगा. मोदी सरकार का यह दावा कि यूपीआई को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने का यही एकमात्र तरीका है, झूठ है.’&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;785&quot; data-end=&quot;1006&quot;&gt;उनके अनुसार, ‘ 2025-26 में भारतीय रिजर्व बैंक ने मोदी सरकार को 2.86 लाख करोड़ रुपये का अधिशेष हस्तांतरित किया था. इस महत्वपूर्ण डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को समर्थन देने के लिए उस अधिशेष का केवल एक छोटा-सा हिस्सा ही पर्याप्त होगा.’&lt;/p&gt;
&lt;blockquote class=&quot;twitter-tweet&quot;&gt;
&lt;p dir=&quot;ltr&quot; lang=&quot;en&quot;&gt;The Finance Minister’s response to my so-called ‘canards’ hinges on 5 dubious claims –&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;1. Merchant Discount Rate (MDR) applies only to merchants and not to customers&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;This is misleading. MDR is charged to merchants but it is inevitable that they pass transaction costs on to… &lt;a href=&quot;https://t.co/Kje7fnWy18&quot;&gt;pic.twitter.com/Kje7fnWy18&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) &lt;a href=&quot;https://x.com/Jairam_Ramesh/status/2085630705359556858?ref_src=twsrc%5Etfw&quot;&gt;August 7, 2026&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&lt;/blockquote&gt;
&lt;p&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;1008&quot; data-end=&quot;1269&quot;&gt;जयराम रमेश ने यह भी कहा कि अमेरिका द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत पर युद्धविराम स्वीकार करने का दबाव बनाने के दावों, रूसी तेल पर अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन करने और चिंताओं के बावजूद ‘अनुचित’ मसौदा व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद यह संशोधन लाया गया है.&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;1271&quot; data-end=&quot;1675&quot;&gt;उन्होंने आगे कहा, ‘यह संशोधन अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की 2026 की उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें यूपीआई और RuPay के मुफ्त होने की आलोचना की गई है और आरोप लगाया गया है कि उन्होंने Visa और MasterCard जैसे अमेरिकी भुगतान मंचों को बाजार से बाहर कर दिया है. क्या प्रधानमंत्री अपने ‘अच्छे मित्र’ डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में यूपीआई को कमजोर कर डिजिटल भुगतान क्षेत्र को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलना चाहते हैं?’&lt;/p&gt;
&lt;p data-start=&quot;1677&quot; data-end=&quot;1928&quot; data-is-last-node=&quot;&quot; data-is-only-node=&quot;&quot;&gt;वहीं, इस विधेयक को वापस लेने की मांग करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) पोलित ब्यूरो की ओर से कहा गया, ‘जब आम नागरिकों ने इसे भुगतान और लेनदेन का प्रमुख माध्यम बना लिया है, तब सरकार लेनदेन शुल्क लगाने का प्रस्ताव लाकर इसी सार्वजनिक अवसंरचना को राजस्व का स्रोत बनाने की कोशिश कर रही है….’&lt;/p&gt;
&lt;blockquote class=&quot;twitter-tweet&quot;&gt;
&lt;p dir=&quot;ltr&quot; lang=&quot;en&quot;&gt;CPI(M) Polit Bureau Says No to Charges on UPI Transactions &lt;a href=&quot;https://t.co/OYgvMlYMmR&quot;&gt;pic.twitter.com/OYgvMlYMmR&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;— CPI (M) (@cpimspeak) &lt;a href=&quot;https://x.com/cpimspeak/status/2085303370735292609?ref_src=twsrc%5Etfw&quot;&gt;August 6, 2026&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&lt;/blockquote&gt;
&lt;p&gt;&lt;/p&gt;
</description><link>https://thewirehindi.com/334878/lok-sabha-passes-bill-allowing-govt-to-permit-banks-others-to-charge-customers-for-upi-transactions/</link><guid isPermaLink="false">https://thewirehindi.com/334878/lok-sabha-passes-bill-allowing-govt-to-permit-banks-others-to-charge-customers-for-upi-transactions/</guid><pubDate>Fri, 07 Aug 2026 01:58:40 GMT</pubDate><author>[object Object]</author><enclosure url="https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/high-1.jpg" type="image/jpeg"></enclosure><itunes:image href="https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/high-1.jpg"></itunes:image><category>भारत</category><category>BHIM-UPI QR codes</category><category>featured</category><category>Finance Minister Nirmala Sitharaman</category><category>Lok Sabha</category><category>News</category><category>Opposition MPs</category><category>Payment and Settlement Systems Act</category><category>The Taxation and other Laws (Amendment) Bill</category><category>The Wire Hindi</category><category>unified payments interface (UPI)</category></item><item><title>झारखंड: नाबालिग से बलात्कार के शक में भीड़ ने एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या की</title><description>&lt;p&gt;यह घटना चतरा ज़िले की है. मृतक की पहचान मोहम्मद इमरोज़ के रूप में हुई है. आरोप है कि मंगलवार को 100-150 लोगों की भीड़ उनके घर पहुंची और परिवार पर गांव की एक लड़की को जबरन अपने घर में बंधक बनाकर रखने का आरोप लगाया और पीट-पीटकर हत्या कर दी. बताया गया है कि मृतक पर बलात्कार के आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है.&lt;/p&gt;
&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;img src=&quot;https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2021/01/Lynching-Illustration-Paripab-The-Wire.jpg&quot; alt=&quot;Lynching Illustration Paripab The Wire&quot; style=&quot;max-width: 100%; height: auto;&quot; referrerpolicy=&quot;no-referrer&quot;&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नई दिल्ली:&lt;/strong&gt; झारखंड के चतरा ज़िले में एक व्यक्ति पर नाबालिग लड़की के बलात्कार का आरोप लगा था, जिनकी मंगलवार (4 अगस्त) को &lt;a href=&quot;https://thewire.in/rights/man-suspected-of-raping-teenager-lynched-by-mob-in-jharkhand&quot;&gt;पीट-पीटकर हत्या&lt;/a&gt; कर दी गई.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;https://indianexpress.com/article/india/mob-lynches-man-in-jharkhand-after-minor-girl-alleges-he-confined-raped-her-10818693/&quot;&gt;इंडियन एक्सप्रेस&lt;/a&gt; की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने कहा है कि मृतक पर बलात्कार के आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;मृतक की पहचान मोहम्मद इमरोज़ के रूप में हुई है. आरोप है कि मंगलवार को 100-150 लोगों की भीड़ उनके घर पहुंची और परिवार पर गांव की एक लड़की को जबरन अपने घर में बंधक बनाकर रखने का आरोप लगाया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इमरोज़ के पिता मोहम्मद सुल्तान की शिकायत के अनुसार, जब परिवार ने लड़की को उसकी मर्ज़ी के बिना ज़बरदस्ती रखने के आरोपों से इनकार किया, तो भीड़ ने इमरोज़ के माता-पिता को बांध दिया और उनके साथ मारपीट शुरू कर दी.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;शिकायत में कहा गया है कि जब इमरोज़ अपने माता-पिता को बचाने के लिए आगे आया तो भीड़ ने उन पर लाठियों और पत्थरों से हमला किया.&amp;nbsp;इमरोज़ के पिता ने यह भी आरोप लगाया है कि घटना के दौरान कुछ पुलिसकर्मी भी मौके पर मौजूद थे.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;https://www.newindianexpress.com/amp/story/india/2026/Aug/05/rape-accused-lynched-by-mob-in-jharkhands-chatra-11-arrested&quot;&gt;न्यू इंडियन एक्सप्रेस&lt;/a&gt; की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि, टंडवा एसडीपीओ प्रभात रंजन ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले ही भीड़ ने हमला शुरू कर दिया था.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;उन्होंने कहा कि मुश्किल बचाव अभियान के बाद पुलिस ने गंभीर रूप से घायल इमरोज़ को टंडवा कम्युनिटी हेल्थ सेंटर पहुंचाया. बाद में उन्हें हज़ारीबाग़ के एक अस्पताल में रेफर किया गया, जहां चोटों के कारण उनकी मौत हो गई.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;शर्मा ने कहा, ‘टंडवा पुलिस थाने में दो एफआईआर दर्ज की गई हैं. एक एफआईआर मृतक के पिता ने मॉब लिंचिंग से संबंधित धाराओं के तहत दर्ज कराई है, जबकि दूसरी एफआईआर नाबालिग लड़की की शिकायत पर पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज की गई है.’&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ खबरों में यह भी कहा गया है कि इमरोज़ को वर्ष 2023 में एक बलात्कार के मामले में जेल भेजा गया था.&amp;nbsp;इस मामले में दर्ज एफआईआर में मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा हत्या) से संबंधित धाराएं भी शामिल की गई हैं. अधिकारियों के मुताबिक, शिकायत में 56 लोगों को नामजद किया गया है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मारपीट का वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) देवलाल उरांव के अनुसार, मॉब लिंचिंग के इस मामले में अब तक 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;उरांव ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि गांव की एक लड़की सोमवार (3 अगस्त) की रात लापता हो गई थी. मंगलवार को उसके मिलने के बाद उसने कथित तौर पर आरोप लगाया कि उसे इमरोज़ के घर में बंधक बनाकर रखा गया था. इसके बाद ग्रामीण एकत्र हुए और इमरोज़ के घर पर धावा बोल दिया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;बीडीओ ने कहा, ‘लड़की को मेडिकल जांच के लिए भेजा गया है और प्रशासन रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है. रिपोर्ट आने के बाद ही आरोपों के संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा.’&lt;/p&gt;
</description><link>https://thewirehindi.com/334859/rights-man-suspected-of-raping-teenager-lynched-by-mob-in-jharkhand/</link><guid isPermaLink="false">https://thewirehindi.com/334859/rights-man-suspected-of-raping-teenager-lynched-by-mob-in-jharkhand/</guid><pubDate>Fri, 07 Aug 2026 01:54:28 GMT</pubDate><author>[object Object]</author><enclosure url="https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2021/01/Lynching-Illustration-Paripab-The-Wire.jpg" type="image/jpeg"></enclosure><itunes:image href="https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2021/01/Lynching-Illustration-Paripab-The-Wire.jpg"></itunes:image><category>समाज</category><category>Crime</category><category>featured</category><category>Jharkhand</category><category>lynched</category><category>mob lynching</category><category>Mohammed Imroze</category><category>News</category><category>Rape of a minor</category><category>Society</category><category>Suspicion of rape</category></item><item><title>मध्य प्रदेश: दतिया में भाजपा की हार की वजह भितरघात था या कांग्रेस की रणनीति?</title><description>&lt;p&gt;दतिया उपचुनाव में भाजपा की हार के पीछे सिर्फ़ भितरघात नहीं, बल्कि नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटना, स्थानीय बनाम बाहरी उम्मीदवार का मुद्दा और कांग्रेस की रणनीतिक प्रत्याशी चयन की भूमिका भी अहम रही. यह रिपोर्ट इन राजनीतिक समीकरणों और चुनावी नतीजों के पीछे की परतों का विश्लेषण करती है.&lt;/p&gt;
&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;img src=&quot;https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Datia-assembly-bypoll.jpg&quot; alt=&quot;Datia assembly bypoll&quot; style=&quot;max-width: 100%; height: auto;&quot; referrerpolicy=&quot;no-referrer&quot;&gt;&lt;br&gt;&lt;br&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ग्वालियर:&lt;/strong&gt; विधानसभा चुनावों के बाद से ही सुस्त पड़ी मध्य प्रदेश की राजनीति में करीब ढाई साल बाद 2 अप्रैल 2026 को तब हलचल देखी गई जब दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी और जालसाजी के एक मामले में तीन साल क़ैद की सज़ा सुनाई.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;हालांकि, अदालत ने अपील के लिए भारती को 60 दिन की मोहलत देते हुए सज़ा को तब तक के लिए निलंबित रखा, लेकिन विधानसभा सचिवालय ने तत्परता दिखाते हुए उसी रोज देर रात आनन-फानन में विधानसभा खोली और अदालती फैसले के महज 10 घंटों की भीतर ही भारती की विधानसभा सदस्यता छीनकर सीट रिक्त घोषित कर दी गई.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;कांग्रेस और भारती ने सदस्यता रद्द करने में दिखाई गई इस तेजी का विरोध भी जताया था. राजनीति के जानकारों के लिए यह घटनाक्रम अप्रत्याशित था. अब दतिया सीट पर हुए उपचुनाव का समापन भी अप्रत्याशित नतीजों के साथ हुआ है.&amp;nbsp;कम से कम राज्य के सत्तारूढ़ दल भाजपा के लिए तो इन नतीजों को अप्रत्याशित ही कहा जा सकता है क्योंकि अपनी पूरी ताकत झोंकने के बाद भी मोहन यादव सरकार इस सीट को कांग्रेस से छीन नहीं पाई.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;बीते 3 अगस्त को आए उपचुनाव के परिणामों में कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,016 मतों से &lt;a href=&quot;https://thewirehindi.com/334624/bankipur-datia-byelection-result-2026-prashant-kishore-congress-bjp/&quot;&gt;हरा दिया&lt;/a&gt;.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;क्यों खास था दतिया का उपचुनाव?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इस उपचुनाव पर पूरे देश की नज़र थी क्योंकि दतिया विधानसभा सीट मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की हुआ करती थी. वह 2008 से 2018 तक लगातार तीन बार यहां से चुने गए थे. मध्य प्रदेश में 2020 में हुए कांग्रेस सरकार के ‘तख्तापलट’ में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है. उस घटनाक्रम के बाद शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में बनी भाजपा सरकार में उन्हें गृह मंत्री बनाया गया था. गृह मंत्री रहते उन्होंने अपनी छवि एक कट्टर हिंदूवादी नेता के तौर पर स्थापित की.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;अपने कार्यकाल के दौरान नरोत्तम मिश्रा फिल्मों, वेब सीरीज़ और मनोरंजन जगत से जुड़े विवादों पर लगातार सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देते रहे. किसी फिल्म, वेब सीरीज़ या गीत की सामग्री पर आपत्ति जताने के बाद वे कई बार पुलिस को संबंधित पक्षों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने या कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश देने की बात कहते थे. इसी तरह, कुछ स्टैंडअप कॉमेडियनों की टिप्पणियों पर भी उन्होंने धार्मिक भावनाएं आहत होने का हवाला देते हुए पुलिस कार्रवाई करवाई थी.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;तब राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चाएं आम थीं कि वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खास हैं और 2023 के विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;हालांकि, 2023 के विधानसभा चुनाव में वह अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के राजेंद्र भारती से हार गए थे और तब से ही पार्टी के भीतर हाशिए पर थे. दतिया सीट रिक्त होने के बाद उन्हें उम्मीद की किरण दिखी और अगले ही दिन से उपचुनाव की तैयारी में जुट गए. वह पूरी तरह आश्वत थे कि पार्टी उन्हें ही टिकट देगी.&lt;/p&gt;
&lt;figure id=&quot;attachment_334889&quot; aria-describedby=&quot;caption-attachment-334889&quot; style=&quot;width: 767px&quot; class=&quot;wp-caption aligncenter&quot;&gt;&lt;img class=&quot;wp-image-334889&quot; src=&quot;https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Narottam-Mishra.jpg&quot; alt=&quot;BJP leader Narottam Mishra speaks on the Datia Assembly bypoll after he was denied the party ticket, in New Delhi, Sunday, July 12, 2026. Photo: PTI.&quot; width=&quot;767&quot; height=&quot;445&quot; srcset=&quot;https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Narottam-Mishra.jpg 1050w, https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Narottam-Mishra-300x174.jpg 300w, https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Narottam-Mishra-768x446.jpg 768w, https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Narottam-Mishra-480x279.jpg 480w&quot; sizes=&quot;(max-width: 767px) 100vw, 767px&quot; referrerpolicy=&quot;no-referrer&quot;&gt;&lt;figcaption id=&quot;caption-attachment-334889&quot; class=&quot;wp-caption-text&quot;&gt;&lt;em&gt;नई दिल्ली, 12 जुलाई 2026: दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भाजपा का टिकट नहीं मिलने के बाद पार्टी नेता नरोत्तम मिश्रा मीडिया से बातचीत करते हुए. (फोटो: पीटीआई)&lt;/em&gt;&lt;/figcaption&gt;&lt;/figure&gt;
&lt;p&gt;यहां फिर तस्वीर बदली और अप्रत्याशित घटनाक्रम में भाजपा ने नरोत्तम का टिकट काटकर पार्टी संगठन से जुड़े आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बना दिया. इससे नरोत्तम के समर्थक नाराज हो गए और दतिया में &lt;a href=&quot;https://www.facebook.com/BBCnewsHindi/videos/%E0%A4%AE%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%A6%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%AA%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%AE-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%95-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8/1711140653770613/&quot;&gt;हिंसक प्रदर्शन भी किया&lt;/a&gt;. पार्टी नेतृत्व से मिलने के बाद नरोत्तम के तेवर ठंडे तो पड़ गए और उन्होंने अपने समर्थकों को समझाया, लेकिन उनके मन में जो टीस थी वो एक चुनावी सभा में तब सामने आ गई, जब मंच पर बोलते-बोलते उनकी आंखों में आंसू आ गए.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;यही वजह थी कि भाजपा की संभावनाओं पर लगातार भितरघात का भय बना हुआ था.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;क्या भितरघात ही रहा भाजपा की हार की असल वजह?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;चुनाव परिणाम आने के बाद से भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी का एक बयान काफी चर्चा में है. उनके शब्द थे कि ‘पार्टी को मां कहने वालों ने इस चुनाव में दिखावा किया है’. एक मौके पर वह मीडिया के भितरघात संबंधी सवाल पर यह भी कहते &lt;a href=&quot;https://www.facebook.com/share/v/1F5FiEeQ6U/?mibextid=wwXIfr&quot;&gt;नज़र आए&lt;/a&gt;, ‘ऐसी चर्चा होती रहती हैं, लेकिन धुआं उठा है तो आग तो लगी होगी.’&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;उन्होंने आगे कहा, ‘जीवन में पवित्रता खत्म करके जीवन जीने से बड़ी कोई कायरता नहीं है. जिस दिन मुझे लगेगा कि इस क्षेत्र में काम नहीं करना है, उस दिन डंके की चोट पर कहूंगा. हम नेतृत्व से कुछ कह भी नहीं पा रहे हैं और फिर धोखाधड़ी करना, ये चरित्र में नहीं होना चाहिए. कांग्रेस के नेता का बयान आने से मेरे कान खड़े हो गए. पार्टी नेतृत्व इसे संज्ञान में लेगा.’&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;गौरतलब है कि मतगणना के दौरान मीडिया से बातचीत में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने नरोत्तम समर्थकों से मदद मिलने का दावा किया था.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;आशुतोष के बयान जरूर भितरघात की ओर इशारा कर रहे हैं, लेकिन ग्वालियर-चंबल अंचल के वरिष्ठ पत्रकार देव श्रीमाली अकेले भितरघात को हार की वजह नहीं मानते हैं. वह कहते हैं, ‘2023 विधानसभा चुनाव में तो कोई भितरघात नहीं था, तब भी भाजपा के नरोत्तम हार गए थे.’&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;वह बताते हैं कि जितना भितरघात भाजपा में हुआ, उतना तो कांग्रेस में भी हुआ. अगर भाजपा में आरोप है कि नरोत्तम समर्थकों ने पार्टी पक्ष में काम नहीं किया, तो आरोप तो पूर्व विधायक राजेंद्र भारती पर भी है कि उन्होंने कांग्रेस के विरोध में काम किया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;बता दें कि भारती पर यह आरोप स्वयं घनश्याम सिंह ने लगाए थे. चुनाव परिणाम आने से एक दिन पहले ही कांग्रेस ने भितरघात, अनुशासनहीनता और पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ काम करने के आरोप में भारती को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी निलंबित कर दिया था.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;दतिया जिले के स्थानीय पत्रकार शुभम मुड़िया ने पूरा चुनाव कवर किया था. उनका कहना है, ‘यह बात सही है कि नरोत्तम के समर्थक नाराज थे. अंदरखाने उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार की मदद भी की. फिर भी भाजपा की हार का अकेला कारण भितरघात नहीं रहा. कई फैक्टर एक साथ काम कर रहे थे.’&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;‘स्थानीय बनाम बाहरी’ फैक्टर हुआ हावी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;आशुतोष मूलत: दतिया जिले की ही भांडेर विधानसभा से आते हैं मगर दतिया विधानसभा के मतदाताओं के लिए बाहरी थे. वह पार्टी में संभागीय संगठन मंत्री रहे थे और मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन. जानकारों के मुताबिक, इस फैक्टर ने चुनाव को सबसे अधिक प्रभावित किया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;श्रीमाली कहते हैं, ‘आशुतोष दतिया में पार्टी कार्यकर्ताओं तक को नहीं जानते थे. कार्यकर्ताओं और जनता के लिए भी वो अनजान चेहरा थे. दूसरी तरफ, घनश्याम सिंह मतदाताओं के लिए एक जाना-पहचाना नाम थे. वह दतिया राजघराने से ताल्लुक रखते हैं. दो बार दतिया के विधायक भी रहे.’&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;श्रीमाली के मुताबिक, आशुतोष न तो दतिया का मिजाज समझते थे और न ही जातिगत समीकरण. वह उन्हीं कार्यकर्ताओं पर आश्रित थे जो वहां पहले से काम कर रहे थे और वह कार्यकर्ता नरोत्तम के नाराज समर्थक थे.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;शुभम भी ऐसा ही सोचते हैं. वह कहते हैं, ‘बूथ कार्यकर्ताओं से लेकर पार्षदों और अन्य पदाधिकारियों ने चुनाव बिल्कुल गंभीरता से नहीं लिया.’&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;चुनाव कवर करने वाले ग्वालियर-चंबल अंचल के ही एक अन्य पत्रकार सूर्य प्रताप सिंह जाट का कहना है कि भाजपा का अधिकांश समय आशुतोष को स्वीकार्यता दिलाने में ही बीत गया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;यहां सवाल उठता है कि क्या भाजपा नेतृत्व आशुतोष की दावेदारी से जुड़ी चुनौतियों का अंदाजा लगाने में विफल रहा? इसका जवाब प्रदेश की मोहन यादव सरकार के राजनीतिक समीकरणों में छिपा है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;‘पावर सेंटर’ का डर और जीत को आश्वस्त&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;नरोत्तम राज्य की राजनीति में एक कड़क मिजाज, दबंग और दिग्गज नेता की छवि रखते हैं. वह राज्य का जनसंपर्क मंत्रालय भी संभाल चुके हैं. नतीजतन, मीडिया से उनका गहरा जुड़ाव रहा है. पिछली भाजपा सरकार में जब वह गृहमंत्री थे तब सीएम शिवराज से अधिक सुर्खियों में रहते थे और राज्य में भाजपा का एक ‘पावर सेंटर’ माने जाते थे.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले ही अपनी सरकार में पार्टी के अन्य नेताओं जैसे कैलाश विजयवर्गीय, राकेश सिंह, प्रहलाद पटेल जैसे ‘पावर सेंटर’ से तालमेल बैठा रहे हैं. विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर भी एक ‘पावर सेंटर’ ही थे. इसके अलावा, ज्योतिरादित्य सिंधिया भी ग्वालियर-चंबल की राजनीति में खास दखल रखते हैं. उनके खेमे को भी मंत्रिमंडल में समायोजित करके आगे बढ़ना होता है. इन चुनौतियों के बीच, सीएम और भाजपा नरोत्तम के रूप में एक और ‘पावर सेंटर’ खड़ा नहीं करना चाहते थे.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;नरोत्तम के चुनाव जीतने की स्थिति में उन्हें कोई महत्वपूर्ण मंत्रालय देना ही पड़ता.&amp;nbsp;इसलिए यह जोखिम लेने से बेहतर पार्टी ने सत्ता-संगठन की पूरी ताकत झोंककर चुनाव लड़ने का फैसला लिया. पार्टी ने चुनाव प्रचार में 12 मंत्री, 2 केंद्रीय मंत्री, 6 सांसद समेत सैकड़ा भर से अधिक विधायक, पूर्व विधायक/मंत्री और पार्टी पदाधिकारियों को मैदान में उतार दिया. इनमें स्वयं सीएम यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री एवं पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे दिग्गज शामिल थे.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;दतिया सीट पर कुशवाह मतदाता निर्णायक भूमिका में होते हैं. पार्टी के जिलाध्यक्ष रघुवीर कुशवाह पहले से ही समाज का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाह को भी पार्टी ने चुनाव प्रभारी बनाकर भेज दिया. हालांकि, इसका फायदा भाजपा को नहीं मिला.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;स्थानीय पत्रकार बताते हैं कि बीते मार्च भाजपा पार्षद कल्लू कुशवाह की हत्या की गई थी, जिससे कुशवाह समाज नाराज था. मतदान से एक दिन पहले ही कल्लू कुशवाह की पत्नी ने एक वीडियो जारी करके भाजपा को वोट न देने की अपील कर दी थी. वहीं, अपने चिर प्रतिद्वंद्वी यादव वोट भाजपा के पक्ष में होने के चलते भी कुशवाह वोटर का झुकाव कांग्रेस की ओर दिखा.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;भाजपा ने कांग्रेस के वोट काटने के लिए पर्दे के पीछे से आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार दामोदर सिंह का भी समर्थन किया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;दामोदर से जुड़ा किस्सा रोचक है. स्थानीय लोग बताते हैं कि दामोदर के साथ नरोत्तम की नजदीकियां रही हैं. नरोत्तम को पूरी उम्मीद थी कि वही भाजपा उम्मीदवार होंगे, इसलिए उन्होंने कांग्रेस के वोट काटने के लिए दामोदर का पर्चा भराया था. हालांकि, जब नरोत्तम का ही टिकट कट गया तब भाजपा ने दामोदर को आगे बढ़ाया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;बहरहाल, पत्रकार सूर्य प्रताप सिंह का कहना है कि भाजपा इस अहंकार में रही कि वह सत्ता, संगठन और अपनी रणनीति के बूते किसी को भी जिता सकती है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;कांग्रेस का एक दांव पड़ा भारी&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ग्वालियर-चंबल के एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा कि भाजपा तब भी नहीं जीतती जब नरोत्तम चुनाव लड़ते. उन्होंने कहा, ‘अगर नरोत्तम को टिकट मिलता तो संभव था कि कांग्रेस राजेंद्र भारती के परिवार में किसी को टिकट देती. नरोत्तम ने भारती के साथ जो कृत्य किए हैं, उसे देखते हुए मतदाता सहानुभूति दिखाते हुए भारती के पक्ष में वोट करते.’&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;बता दें कि भाजपा की तरह ही कांग्रेस का भी प्रत्याशी चयन चौंकाने वाला रहा. कांग्रेस से टिकट पाने की दौड़ में सिर्फ राजेंद्र भारती की पत्नी शोभा भारती और अवधेश नायक के नाम थे.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;श्रीमाली बताते हैं, ‘नरोत्तम का टिकट कटते ही कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बदल लिया, ताकि उनके समर्थकों की नाराजगी भुनाई जा सके. नरोत्तम समर्थक भारती से नफरत करते हैं. अगर उनके परिवार के किसी सदस्य को टिकट मिलता तो नरोत्तम और उनके समर्थकों का वोट कांग्रेस को ट्रांसफर होने की उम्मीद समाप्त हो जाती.’&lt;/p&gt;
&lt;figure id=&quot;attachment_334891&quot; aria-describedby=&quot;caption-attachment-334891&quot; style=&quot;width: 839px&quot; class=&quot;wp-caption aligncenter&quot;&gt;&lt;img class=&quot;wp-image-334891 &quot; src=&quot;https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Congress-workers--1034x800.jpg&quot; alt=&quot;&quot; width=&quot;839&quot; height=&quot;649&quot; srcset=&quot;https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Congress-workers--1034x800.jpg 1034w, https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Congress-workers--300x232.jpg 300w, https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Congress-workers--768x594.jpg 768w, https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Congress-workers--480x371.jpg 480w, https://thewirehindi.com/wp-content/uploads/2026/08/Congress-workers-.jpg 1050w&quot; sizes=&quot;(max-width: 839px) 100vw, 839px&quot; referrerpolicy=&quot;no-referrer&quot;&gt;&lt;figcaption id=&quot;caption-attachment-334891&quot; class=&quot;wp-caption-text&quot;&gt;&lt;em&gt;भोपाल, 3 अगस्त 2026: दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह की जीत के बाद प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय (पीसीसी) में जश्न मनाते कांग्रेस कार्यकर्ता. (फोटो: पीटीआई)&lt;/em&gt;&lt;/figcaption&gt;&lt;/figure&gt;
&lt;p&gt;यही स्थिति अवधेश नायक के मामले में भी बनती. अवधेश पहले भाजपा में ही थे. 2023 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में आए थे. वह भी नरोत्तम के विरोधियों में शुमार होते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;जानकारों के मुताबिक, यहीं कांग्रेस दांव खेल गई और घनश्याम सिंह को ले आई, जो पूरे चुनाव का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जिसकी भाजपा ने कल्पना नहीं की थी. बता दें कि घनश्याम ने पिछले दो चुनाव सेवढ़ा सीट से लड़े थे. 2018 में वह जीते थे, लेकिन 2023 में उन्हें हार मिली थी.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;श्रीमाली के मुताबिक, घनश्याम एक साफ-सुथरी छवि के व्यक्ति रहे हैं, साथ ही उनके नरोत्तम या उनके समर्थकों से भी खराब संबंध नहीं थे. कांग्रेस ने नाराज नरोत्तम समर्थकों को घनश्याम का विकल्प देकर फायदा उठाया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;दतिया विधानसभा में 2008 से पहले तक भाजपा केवल एक बार (1990) जीती थी. 2008 में नरोत्तम डबरा सीट छोड़कर दतिया आए और लगातार तीन बार जीते. हर बार शहरी क्षेत्र ने उनकी जीत सुनिश्चित की. 2023 में भाजपा शहरी क्षेत्र में पिछड़ी तो हार गई. इस बार भी यही हुआ.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इसके साथ ही स्थानीय लोगों और विश्लेषकों का कहना है कि मतदान से चंद रोज पहले ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन ने भी शहरी मतदाताओं का भाजपा से मोह भंग किया.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;क्या होगा नरोत्तम का भविष्य?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;फिलहाल भाजपा ने दतिया की जिला कार्यकारिणी &lt;a href=&quot;https://thewirehindi.com/334727/bjp-dissolves-datia-district-unit-after-assembly-bypoll-defea/&quot;&gt;भंग कर दी&lt;/a&gt;&amp;nbsp;है, जिसमें नरोत्तम समर्थक ही शामिल थे. वहीं, नरोत्तम ने बयान दिया है कि उनकी राजनीति का पटाक्षेप हो गया है. उन्हें अब कोई पद लेने की इच्छा नहीं है; बस कार्यकर्ता के रूप में पार्टी कहीं न कहीं काम करने के लिए भेजती रहे.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;श्रीमाली कहते हैं, ‘राजनीति में किसी भी व्यक्ति का अंत नहीं होता है. भविष्य परिस्थितियों से तय होता है. नरोत्तम अंचल के कद्दावर नेता हैं. उन्हें किनारे लगाने का मतलब होगा कि भाजपा को नया ब्राह्मण नेता खड़ा करना होगा. ये आसान नहीं होता है. जहां तक जिला कार्यकारिणी भंग करने का सवाल है तो यह सिर्फ फेस सेविंग की कवायद है.’&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;शुभम का कहना है, ‘जैसा आशुतोष का रवैया है, उसे देखते हुए नरोत्तम अब दतिया में टिक नहीं पाएंगे. आशुतोष का बयान है कि मैं तो झोला उठाकर आ गया हूं, चाहे मुझे मारो या पालो. मैं तो यहीं रहूंगा.’&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;हालांकि, शुभम यह भी जोड़ते हैं, ‘भाजपा नरोत्तम पर कोई कार्रवाई नहीं करेगी बल्कि साधने का ही प्रयास करेगी क्योंकि उत्तर प्रदेश में चुनाव आने वाला है. नरोत्तम को कानपुर क्षेत्र में जिम्मदारी मिलती रही है और वो पार्टी को फायदा पहुंचाते भी रहे हैं. वह ब्राह्मणों का क्षेत्र है. भाजपा चाहेगी कि कम से कम यूपी चुनाव तक नरोत्तम को न छेड़ा जाए.’&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;बहरहाल, इस चुनावी नतीजे को प्रदेश की राजनीति के नजरिये से देखें तो भाजपा लगातार दो उपचुनाव हार चुकी है. ये दोनों ही हार उसे ग्वालियर-चंबल अंचल में ही मिली हैं. इससे पहले श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा सीट पर भी उसे उपचुनाव में हार मिली थी. हालांकि, वह सीट भी 2023 में कांग्रेस ने ही जीती थी, लेकिन कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत के भाजपा में जाने से वह खाली हो गई थी. उपचुनाव में रावत ही भाजपा उम्मीदवार थे और हार गए थे.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;यह भाजपा और सीएम यादव के लिए चिंता का विषय इसलिए है क्योंकि 2023 की बंपर जीत में भी भाजपा का प्रदर्शन अंचल में अच्छा नहीं रहा था. कांग्रेस के लिए यह जीत किसी टॉनिक की तरह है. लगातार भाजपा से सांगठनिक और रणनीतिक मोर्चे पर पिछड़ रही पार्टी ने इस बार अपनी सूझ-बूझ भरी रणनीति के बूते पूरी ताकत से चुनाव लड़ रही भाजपा को करारी शिकस्त दी है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;em&gt;(दीपक गोस्वामी स्वतंत्र पत्रकार हैं.)&lt;/em&gt;&lt;/p&gt;
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